जमरानी बांध परियोजना की 2584.10 करोड़ रुपये की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) स्वीकृत होने के बाद सिंचाई विभाग बांध स्थल का दोबारा सर्वे कर डिजायन तैयार करेगा। सर्वेक्षण के लिए सिंचाई विभाग ने शासन से 50 लाख रुपये की मांग की है। वन भूमि के क्षतिपूरक की शेष 47 करोड़ रुपये की धनराशि देने का भी अनुरोध प्रदेश सरकार से किया गया है।
सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता मोहन चंद्र पांडेय ने बताया कि बांध की आखिरी सर्वे 2012 में की गई थी। बांध की पूर्व सर्वे में 25 लाख रुपये खर्च हुए। इसके अलावा पर्यावरण की क्लीयरेंस में भी करीब 15 लाख रुपये खर्च किए गए। अब बांध की दोबारा सर्वे और ने डिजायन पर भी करीब 8 लाख रुपया खर्च आने का अनुमान है।
विभाग ने पूर्व में हुए खर्च के साथ ही मौजूदा सर्वे के लिए 50 लाख रुपये की डिमांड शासन से की है। इसके अलावा बांध की पर्यावरण और वन भूमि की सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। वन भूमि की सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद वन विभाग ने क्षतिपूरक के 89 करोड़ रुपये की डिमांड की थी।
विभाग ने वन भूमि के क्षतिपूरक की 41 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है। अब 48 करोड़ रुपये वन विभाग को दिए जाने हैं। शासन से वन भूमि के क्षतिपूरक की शेष 48 करोड़ रुपये की धनराशि भी शासन से मांगी गई है। इन मामलों का निस्तारण होने पर विभाग बांध स्थल पर निर्बाध गति से काम करा सकेगा।