अशोक कुमार का जन्म 20 नवंबर 1964 को हरियाणा के पानीपत जिले के कुराना गांव में हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद आईआईटी दिल्ली से बीटेक और एमटेक की शिक्षा प्राप्त की थी।
सम्मान
वर्ष 2001 में दक्षिण पूर्व यूरोप के कोसोवो में उत्कृष्ट कार्य के लिए यूएन मिशन पदक मिला था। वर्ष 2006 में दीर्घ एवं उत्कृष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति द्वारा पुलिस पदक से सम्मानित किया गया।
तराई से अपराध खत्म करने में अहम भूमिका
आईपीएस अशोक कुमार के नाम कई महत्वपूर्ण काम रहे हैं। 90 के दशक में तराई से अपराध खत्म करने में भी उनकी अहम भूमिका रही है। शाहजहांपुर, रुद्रपुर, नैनीताल आदि जगहों पर रहते हुए उन्होंने कई बदमाशों के एनकाउंटर किए। इनसे यहां का अपराध पहले की अपेक्षा बेहद कम हो गया। कुख्यातों को जेल भेजने से लेकर उन्हें मार गिराने में अशोक कुमार के नेतृत्व को सराहा गया।
...जब चली थीं 3000 हजार गोलियां
आईपीएस अशोक कुमार नैनीताल के एसपी देहात हुआ करते थे। उस वक्त रुद्रपुर जिला मुख्यालय था। नैनीताल की तलहटी में एक गांव के पास गन्ने के खेत में कुछ बदमाश छुपे होने की सूचना मिली तो उन्होंने फोर्स के साथ मोर्चा संभाला। यहां दोनों ओर से करीब 3000 हजार गोलियां चली थीं। इस एनकाउंटर में हीरा सिंह गैंग के दो कुख्यात बदमाशों की मौत हुई थी। बात 1994 की थी, जिसके बाद से यहां अपराध खत्म होता गया।
1994 में अशोक कुमार चमोली जिले के एसपी थे। उत्तराखंड आंदोलन अपने चरम पर था। लगभग सभी जगहों पर आंदोलनकारी शहीद हो रहे थे। लेकिन, उस वक्त चमोली ही एक ऐसी जगह थी जहां पर एक भी आंदोलनकारी शहीद नहीं हुआ था। पूरा आंदोलन शांतिपूर्वक रहा।
अर्द्धकुंभ पूरा कराया, हरिद्वार में बदमाशों से लिया लोहा
वर्ष 1995 में आईपीएस अशोक कुमार हरिद्वार में तैनात रहे। यहां उन्होंने अर्द्धकुंभ समेत कई मेले शांतिपूर्वक संपन्न कराए। इसके बाद उन्होंने आईजी गढ़वाल रहते हुए कई महत्वपूर्ण मेलों को शांतिपूर्वक पूरा कराया। अशोक कुमार हमेशा से अपने सरल स्वभाव के लिए जाने जाते रहे हैं।
प्रमुख लेखन:
चैलेंजेस टू इंटरनल सिक्यूरिटी-पुस्तक
मैन इन खाकी(खाकी में इंसान)-पुस्तक