फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

82 गांवों में बालिकाओं के कम लिंगानुपात की जांच में जुटे 26 अधिकारी, घर-घर जाकर जुटाएंगे आंकड़े

Tue, 23 Jul 2019 09:25 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी
विज्ञापन
टास्क फोर्स - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के 82 गांवों में बालिकाओं के कम लिंगानुपात की जांच शुरू कर दी गई है। कुल 26 जिला स्तरीय अधिकारी घर-घर जाकर जांच करेंगे। जिला प्रशासन की ओर से सभी अधिकारियों को मातृ प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य पोर्टल का पूरा आंकड़ा उपलब्ध करा दिया गया है।  

विज्ञापन


जिले के जिन 82 गांवों की जांच कराई जा रही है, उनमें भटवाड़ी के 19, डुंडा के 12, चिन्यालीसौड़ के 10, नौगांव के 19, पुरोला के आठ और मोरी के 14 गांव शामिल हैं। जिलाधिकारी डा.आशीष चौहान ने इन अधिकारियों को घर-घर जाकर छह बिंदुओं की जांच कर रिपोर्ट जल्द से जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। बालक एवं बालिकाओं के लिंगानुपात को लेकर जिले में अभी तक जिले के विभिन्न अस्पतालों और घरों पर होने वाले प्रसव के आधार पर ब्लाक एवं जिला स्तर पर तैयार की जाती थी।

इस बार आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से ग्रामवार रिपोर्ट तैयार कराए जाने पर चौंकाने वाले आंकड़े आए। आशाओं की रिपोर्ट के अनुसार बीते तीन माह में जिले में कुल 935 प्रसव हुए, जिसमें 496 बेटे और 439 बेटियां पैदा हुईं। इसमें चौंकाने वाली बात यह रही कि जिले के 133 गांवों में सिर्फ बेटे ही पैदा हुए, जबकि 129 गांवों में सिर्फ बेटियां ही पैदा हुईं। जबकि इसी अवधि में स्वास्थ्य विभाग द्वारा पेश आंकड़ों में जिले में कुल 961 प्रसव हुए, जिसमें 468 बेटे और 479 बेटियां पैदा हुईं। 14 नवजातों की प्रसव के दौरान मृत्यु हो गई।

विज्ञापन

अधिकारी इन बिंदुओं पर करेंगे जांच

1-प्रजनन बाल स्वास्थ्य पोर्टल में गर्भवती का पंजीकरण किस महीने में कराया गया?
2-प्रथम प्रसव में प्रसव के परिणाम की जानकारी और एएनसी जांच की स्थिति।
3-दूसरे गर्भकाल में प्रसव की जांच की तिथियां व किस महीने में पंजीकरण कराया गया?
4-परिवार का प्रोफाइल(0 से 1 वर्ष तक के बालक एवं बालिकाओं का विवरण उम्र सहित)।
5-गांव में 0 से 6 वर्ष आयुवर्ग के बच्चों में लिंगानुपात की स्थिति।
6-एएनएम के पास उपलब्ध गर्भवती महिलाओं की संख्या के साथ वास्तविक संख्या का मिलान।
विज्ञापन

आशाओं की सूची, विभागीय रिपोर्ट और धरातल के आंकड़े अलग-अलग

स्वास्थ्य विभाग से मिली गांववार सूची के आधार पर जब कुछ गांवों में पड़ताल की गई तो इसमें आंकड़े कम- ज्यादा देखने को मिले हैं। न्यूगांव की प्रधान भूरी देवी ने बताया कि बीते तीन माह में उनके गांव में दस प्रसव हुए, जिसमें 4 बेटियां और 6 बेटे पैदा हुए। जबकि आशाओं की सूची में न्यूगांव में सिर्फ दो बेटों की पैदाइश दिखाई गई है। इसी तरह नेताला के प्रधान जगदंबा प्रसाद सेमवाल के अनुसार उनके गांव में बीते छह माह में 6 बेटे और 5 बेटियां पैदा हुई हैं। डुंडा प्रखंड के लोदाड़ा गांव के प्रधान सुजान सिंह चौहान के अनुसार बीते तीन माह में गांव में पांच घरों में प्रसव हुए और सभी बेटे पैदा हुए।

इनमें से चार के प्रसव उत्तरकाशी में ही हुए, जबकि एक का प्रसव ऋषिकेश में हुआ। आशा की रिपोर्ट में भी इस गांव में चार बेटों की पैदाइश बताई गई है। इसी तरह डुंडा ब्लाक के गवाणा गांव की प्रधान सकला देवी ने भी गांव में बीते तीन माह में आशा कार्यकर्ता की रिपोर्ट के अनुरूप चार बेटे पैदा होने की जानकारी दी है। सेकू गांव की प्रधान सरिता देवी ने गांव में दो बेटों का जन्म होने की जानकारी दी है। आशाओं की रिपोर्ट में भी यही दर्ज है। सभी ग्राम प्रधानों ने बेटा या बेटी पैदा होने को महज इत्तफाक बताते हुए गांव में बालिका लिंगानुपात काफी बेहतर होने की बात कही है। जिले के कुछ गांवों में आंकड़ों में विरोधाभास को देखते हुए इसकी ग्रामवार विस्तृत पड़ताल के बाद ही सही स्थिति सामने आ सकती है। 

जिले में ओवरऑल लिंगानुपात काफी बेहतर है, लेकिन इसमें पारदर्शिता लाने के लिए गांव स्तर पर इसका सर्वे कराया गया है। आशाओं और स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों में अंतर की पड़ताल कराई जा रही है। इन सबके बावजूद उन गांवों में जांच शुरू कर दी गई है, जहां बेटों की तुलना में बेटियों की जन्मदर काफी कम है। इस जांच के पूरा होने के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ पाएगी।
-डा.आशीष चौहान, डीएम उत्तरकाशी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें