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सुरक्षा में बड़ी चूक, IMA में फर्जी भर्तियां

Fri, 25 Oct 2013 11:25 AM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून
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एनडीए (नेशनल डिफेंस अकादमी) के बाद अब आईएमए (भारतीय सैन्य अकादमी) में घुसपैठ हो गई है। यहां जाली दस्तावेज के जरिये सिविल पदों पर बड़ी संख्या में नियुक्तियां होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
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अकादमी के प्रशासनिक विभाग ने जांच में अभी तक नकली दस्तावेज के 36 मामले पकड़े हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह संख्या दोगुनी हो सकती है। राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील सैन्य अकादमी में हुए इस फर्जीवाड़े से चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले साल एनडीए में भी कर्मचारी भर्ती घोटाले का खुलासा हुआ था।

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जाली स्कूल सर्टिफिकेट सहित अन्य दस्तावेज
आईएमए के प्रवक्ता ने बताया कि गत वर्ष सिविल कर्मचारियों के कई पदों पर भर्तियां की गई थी। भर्ती के बाद आईएमए प्रक्रिया के तहत नियुक्त कर्मचारियों के दस्तावेज की जांच कर रहे हैं।
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यह एक निर्धारित प्रक्रिया है, जिसमें कई कर्मचारियों के जाली स्कूल सर्टिफिकेट सहित अन्य दस्तावेज की पुष्टि हुई है। सभी कर्मचारी प्रोबेशन कार्यकाल में हैं, इसलिए इनकी सेवाएं समाप्त की जाएंगी।

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2012 में हुई थी नियुक्तियां
वर्ष 2012 में आईएमए में बड़ी संख्या में लोअर डिवीजन क्लर्क, कुक, ड्राइवर, माली, अर्दली, लैब अटेंडेंट आदि पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। केंद्रीय कर्मचारियों की चयन नियमावली के आधार पर आईएमए ने खुद चयन प्रक्रिया बना कर लगभग डेढ़ सौ पदों पर भरती की और उनका दो वर्ष का प्रोबेशन कार्यकाल रखा है।

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शिकायत मिलने के बाद शुरू हुई जांच
सूत्रों के अनुसार फर्जी दस्तावेज की एक शिकायत आने के बाद आईएमए प्रशासनिक विभाग ने सभी अभ्यर्थियों के शैक्षणिक सहित अन्य संलग्न दस्तावेज जांचने की प्रक्रिया शुरू की। मैट्रिक और जमा दो के दस्तावेज को संबंधित प्रदेशों के शिक्षा बोर्डों को भेजा गया। अब तक 36 कर्मचारियों के दस्तावेज फर्जी मिल चुके हैं।

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ड्राइवर-कुक का अनुभव भी फर्जी
कुक और ड्राइवर के पद पर भर्ती किए गए कर्मचारियों के तो दो वर्ष अनुभव के प्रमाणपत्र भी जांच में फर्जी निकले। जिन संस्थान और होटलों के नाम उनके सर्टिफिकेट पर लिखे थे, वहां आवेदन करने वालों ने कभी नौकरी की ही नहीं। वहीं कई ड्राइवरों के बाहरी राज्यों से हासिल भारी वाहन चालक संबंधित दस्तावेज भी नकली पाए गए हैं।

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चुपचाप बाहर करने की तैयारी
आईएमए की प्रशासनिक शाखा मामले की जांच में जुटी है। फर्जी दस्तावेज के पुष्ट 36 मामलों पर कार्रवाई कर उन्हें बर्खास्त करने के आदेश जारी हो चुके हैं। बाहरी राज्यों से फर्जी दस्तावेज के 23 नए मामले पहुंच चुके हैं, जिन पर कार्रवाई तय है। वहीं अन्य का इंतजार किया जा रहा है। आईएमए इनको चुपचाप बर्खास्त करने की तैयारी में है, जबकि फर्जीवाड़े की एफआईआर पुलिस में दर्ज होना जरूरी है।

आईएमए अधिकारी भी कटघरे में
गत वर्ष नेशनल डिफेंस अकादमी में 97 एलडीसी और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की भर्ती में लेनदेन का बड़ा मामला सीबीआई ने पकड़ा था। जिसमें अकादमी के कई वरिष्ठ सैन्य व सिविल अधिकारियों पर केस दर्ज हुआ है। इसके बाद आईएमए में फर्जीवाड़ा होने से सवाल उठ रहे है कि आखिर राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई, जबकि चयन प्रक्रिया आईएमए के सैन्य अधिकारियों ने ही तय की थी।

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सबसे बड़ी सैन्य अकादमी है आईएमए
भारतीय सैन्य अकादमी देश का पहला सैन्य आफिसर्स ट्रेनिंग संस्थान हैं। यहां पर भविष्य के सैन्य अधिकारी तैयार किये जाते हैं। आईएमए से हर वर्ष लगभग 1300 अफसर सेना को मिलते हैं। इसके अलावा सैन्य इतिहास के कई महत्वपूर्ण दस्तावेज संस्थान में सुरक्षित रखे गए हैं। उनकी सुरक्षा के लिए अकादमी के अंदर-बाहर बड़ी संख्या में जवान तैनात रहते हैं। अकादमी में बिना आज्ञा किसी सिविलियन का प्रवेश संभव नहीं है।
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