पिता की सख्त हिदायत थी, अगर फिल्मों में जाना है तो फिर दरवाजा उधर है।
तीन साल तक मुंबई में संघर्ष
दोस्तों ने फीस जुटाई और ट्रेनिंग के लिए फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) में भेज दिया। दो साल ट्रेनिंग और तीन साल तक मुंबई में संघर्ष के बाद फिल्म ‘चिटगांग’ मिली।
यहां से गाड़ी चल निकली। प्रियदर्शन की ‘रंगरेज’ और ‘गैंग ऑफ घोस्ट’ में अहम भूमिकाएं भी कीं। हालांकि संघर्ष जारी है, लेकिन कुछ हद तक सुकून भी है।
डायरेक्टर तिग्मांशु धुलिया की फिल्म ‘यारा’ की शूटिंग कर रहे एक्टर विजय वर्मा अपनी कहानी कुछ इस तरह बयां करते हैं।
शनिवार को दून पहुंचे विजय वर्मा ने बताया कि उनका परिवार हैदराबाद में रहता है, जबकि वे अजमेर से हैं। बकौल विजय, सब कुछ करना चाहता था, पिता के साथ बिजनेस नहीं।
घर में बताया कि स्कॉलरशिप मिली है
एफटीआईआई (पुणे) का एंट्रेंस टेस्ट दूसरी बार में क्लीयर हो गया। फीस और पुणे में रहने का खर्चा कौन देता, इसी उलझन में कई दिन बीत गए। एक दिन मेरे दोस्त ने कहा, खर्चा वह उठाएगा।
घर में बता दूं कि स्कॉलरशिप मिली है। मुंबई आने पर संघर्ष के बीच दूरदर्शन में 1500 रुपए में एक शो किया। इसके बाद ‘चिटगांग’ मिली।
राज निधिमारो और कृष्ण डीके की शॉर्ट मूवी ‘शोर’ में लीड रोल किया, जिसे न्यूयार्क में एमआईएएसी फिल्म फेस्टिवल में अवार्ड मिला। प्रियदर्शन की ‘रंगरेज’ देखने के बाद लोग पिता से तारीफ करने पहुंचे।
तब जाकर उन्होंने मुझे फोन पर शाबासी दी, कहा- ‘बेटे मुझे गर्व है तुम पर’। विजय वर्मा ने बताया दून पहली बार आया हूं। शूटिंग कुछ दिन बाद है। मसूरी और पहाड़ियां घूमना चाहता हूं।