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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: स्वर्णिम पंच जड़ना ही है बॉक्सर शोभा का मकसद, पढ़ें ऐसी ही कुछ और होनहार बेटियों की कहानी

Fri, 05 Mar 2021 10:46 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़
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शोभा, मुस्कान, स्नेहा - फोटो : अमर उजाला
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अंतरराष्टीय महिला दिवस पर हम आपको बता है उत्तराखंड की कुछ ऐसी बेटियों की कहानी जो अपने संघर्ष से ऊंचाईयों तक पहुंचना चाहती हैं। पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर किनीगाड़ निवासी 19 वर्षीय युवा बॉक्सर शोभा कोहली देश के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्णिम पंच जड़ना चाहती है। शोभा ने स्कूल स्तर से बॉक्सिंग की शुरुआत की थी। पड़ोसी को बॉक्सिंग करते देख शोभा इस खेल के प्रति आकर्षित हुई थीं।

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वर्ष 2013 से स्टेडियम में बॉक्सिंग प्रशिक्षक स्व. कृष्ण सिंह महर से खेल की बारीकियां सीखीं। इसके बाद उन्होंने बॉक्सिंग प्रशिक्षक जनार्दन वल्दिया से प्रशिक्षण लिया। इंटर की पढ़ाई के बाद पढ़ाई के साथ खेल जारी रखा। बेटी की लगन और खेल के प्रति लगाव को देखते हुए मां शकुंतला देवी और आरडब्लूडी विकास भवन में कार्यरत पिता भीम राम की प्रेरणा से शोभा ने साई पिथौरागढ़ में प्रवेश लिया।

फिर भारतीय महिला यूथ टीम के मुख्य प्रशिक्षक भास्कर भट्ट के सानिध्य में अपने खेल को निखारा। उन्होंने अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालयी महिला बॉक्सिंग में स्वर्ण, भुवनेश्वर में हुई खेलो इंडिया महिला बॉक्सिंग प्रतियोगिता और यूएस नगर उत्तराखंड में हुई अखिल भारतीय भारतीय यूथ बॉक्सिंग में कांस्य पदक जीता। पांच भाई-बहनों में शोभा सबसे छोटी हैं। बजेटी स्कूल से उन्होंने कक्षा नौ और जीआईसी से इंटर तक पढ़ाई की। अब वह स्थानीय महाविद्यालय में बीए पंचम सेमेस्टर की छात्रा हैं और साई कोच निखिल महर से प्रशिक्षण भी ले रहीं हैं।

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अल्मोड़ा की बैडमिंटन सनसनी स्नेहा

भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल, पीवी संधू की तरह ही अल्मोड़ा की बेटियां भी बैडमिंटन में अपना जलवा बिखेर रही है। स्नेहा रजवार बैडमिंटन खेल में नित नया कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं और जिले के साथ प्रदेश का नाम भी रोशन कर रही हैं।  

नगर के आफिसर्स कालोनी निवासी अमरनाथ सिंह रजवार और विमला रजवार की पुत्री स्नेहा रजवार बैड मिंटन में कई पदक जीत चुकी हैं। स्नेहा ने कक्षा तीन में पढ़ने के दौरान बैडमिंटन का रैकेट थामा था। वर्ष 2017 में देहरादून में हुई उत्तराखंड जूनियर सीनियर चैंपियनशिप के ओपन डबल्स में गोल्ड मेडल और अंडर-17 के डबल्स में स्वर्ण पदक जीता। 2018 में पटना बिहार में हुई ऑल इंडिया सब जूनियर बैडमिंटन प्रतियोगिता के अंडर-17 वर्ग में कांस्य पदक जीता। 2018 में हल्द्वानी में हुई उत्तराखंड स्टेट बैडमिंटन चैंपियनशिप के अंडर-19 के डबल्स में स्वर्ण पदक जीता।

अंडर-17 के सिंगल में भी स्वर्ण पदक जीता। 2019 में भुवनेश्वर में हुई ऑल इंडिया बैडमिंटन चैंपियनशिप के अंडर-17 के डबल्स में स्नेहा ने रजत पदक जीता। इसी साल अल्मोड़ा में हुई ईस्ट इंटर स्टेट बैडमिंटन चैंपियनशिप के ओपन सिंगल में रजत पदक जीता। अंडर-19 में भी रजत पदक अपने नाम किया। स्नेहा जब भी अपने पैतृक गांव आरा जाती है तो वहां भी वह गांव के बच्चों को खेलों के प्रति जागरुक करती है। स्नेहा वर्तमान में हरियाणा के एक एकेडमी में बैडमिंटन का प्रशिक्षण ले रही है।

एथलीट में अंजलि का कोई सानी नहीं

होनहार बच्चे बचपन में अपना लक्ष्य तय करते और फिर उसे हासिल करने के लिए मेहनत में जुट जाते हैं। ऐसा ही लक्ष्य तय किया है पक्काकोट निवासी एथलीट अंजली सिरोही ने। वह फौज में जाकर देश सेवा करना चाहती है। अंजलि राधेहरि राजकीय महाविद्यालय में बीए प्रथम वर्ष की छात्रा है। एथलीट में 400 मीटर दौड़ में अंजलि प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त कर चुकी है।

अंजलि का लक्ष्य नेशनल गेम में गोल्ड मेडिल जीतना है। इसके लिए वह रोजाना तीन घंटे प्रैक्टिस कर रही है। अंजली ने बताया कि उसने 26 जनवरी 2021 को हल्द्वानी में संपन्न हुई राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता में 400 मीटर दौड़ में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। उसके कोच मोहम्मद रफी पासा नेशनल खेलने के लिए उसे प्रोत्साहित करते हैं। वह देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना चाहती है। साथ ही एक बेहतरीन खिलाड़ी बनकर सेना में जाना चाहती हूं। सेना में जाने के लिए उसने एनसीसी भी ज्वाइन की है। हीमा दास उसकी प्रेरणा स्रोत्र हैं। 
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आर्मी में भर्ती होना चाहती है मुस्कान

देश की सीमाओं पर दुश्मनों के दांत खट्टे करने में लड़किया भी पीछे नही है। एथलीट मुस्कान भी देश की रक्षा का जज्बा लिए सेना में भर्ती होना चाहती है। जीजीआईसी में 12 वीं की छात्रा मुस्कान निरंतर प्रैक्टिस करती है। वह अच्छी एथलीट बनकर देश का गौरव बढ़ाना चाहती है। मुस्कान के पिता का स्वर्गवास हो चुका है।

उसकी मां नाजमा एक कारखाने में नौकरी करती है। वह कठिन परिश्रम कर अपनी बेटी को पढ़ा रही है। मुस्कान एथलीट के जरिए अपने सपनों को उड़ान देना चाहती है। मुस्कान ने बताया कि उसे दौड़ने का शौक है। फरवरी 2021 में हल्द्वानी में संपन्न स्टेट प्रतियोगिता की 1600 मीटर की दौड़ में मुस्कान ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। वह नेशनल में गोल्ड मेडल जीत कर सेना में भर्ती हो कर देश सेवा करना चाहती है। 
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