पर्वतीय क्षेत्र के बच्चों में आत्मविश्वास पैदा करने व उनके मार्गदर्शन के लिए 24 सालों से अदिति बच्चों के साथ काम रही थीं, लेकिन वर्ष 2000 में पर्वतीय बाल मंच (पबम) की स्थापना की गई। इसके बाद उत्तराखंड के विभिन्न दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर बच्चों को उनके अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का काम अदिति ने शुरू किया।
गांव स्तर के बच्चों के समूह स्थापित किए गए और फिर बाल अधिकारों, बाल सहभागिता, बाल संरक्षण, भेदभाव, सूचना का अधिकार, स्वच्छता, जन्म पंजीकरण आदि के बारे में बच्चों को खेल के जरिए समझाया। वर्तमान में वह देहरादून के विकासनगर, चमोली जिले के घाट ब्लाक सहित विभिन्न जिलों में 2000 से अधिक बच्चों के साथ काम कर रही हैं। अब वह पर्वतीय बाल मंच की अध्यक्ष हैं।
होटल मैनेजमेंट छोड़ बच्चों की आवाज बनने का उठाया बीड़ा
अदिति का बचपन और प्रारंभिक शिक्षा नैनीताल में हुई। अदिति की मां एक कलाकार हैं और पिता भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त अधिकारी। उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट एंड न्यूट्रिशन, लखनऊ से होटल मैनेजमेंट में स्नातक किया और इसके बाद ताज पैलेस, मौर्य शेरेटन, दिल्ली और भोपाल के आमेर पैलेस में काम किया है, लेकिन अदिति का नौकरी में मन नहीं लगा। उन्हें तो बच्चों की आवाज बनना था।
छोटे से लेकर बड़े बच्चे तक स्वागत को रहते हैं तैयार
अदिति लोगों के लिए गुमनाम हों, लेकिन वह उन बच्चों के लिए आदर्श है, जिनके लिए वह भाग्यविधाता बनीं हैं। गांव में अदिति के आने की खबर मिलते ही बच्चे फूल मालाओं के साथ उनके स्वागत को तैयार रहते हैं।