विभाग की ओर से कई साल पहले ‘पालना’ कार्यक्रम शुरू किया गया। इसमें केदारपुरम स्थित राजकीय बालिका निकेतन के बाहर पालना (बच्चों का झूला) लगाया गया था।
ताकि, कोई भी दंपति बेटी होने पर उसे फेंके नहीं, बल्कि पालने में छोड़ दे। उस बच्ची की परवरिश राजकीय शिशु निकेतन में विभाग की निगरानी में की जाती है।
अब वो समय नहीं रहा जब बेटियों को उपेक्षित नजर से देखा जाता हो। आज लोग बेटियों में ही अपना भविष्य सुरक्षित समझते हैं। प्रोबेशन विभाग भी बेटी प्रोत्साहन को लेकर लगातार प्रयासरत रहता है।
-मीना बिष्ट, जिला प्रोबेशन अधिकारी