घर से मोटर मार्ग की दूरी पांच किमी थी, डोली पर बैठाकर लाया गया
इस बीच हिम्मत सिंह का स्वास्थ्य खराब हो गया, उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। अपने मित्र के बीमार होने की सूचना जब प्रयाग दत्त पाठक को मिली तो वह अपने को रोक नहीं सके। बुधवार को अपने बेटे शिक्षक नवीन चंद्र पाठक के साथ वे अपने मित्र का हालचाल जानने निकल पड़े। घर से मोटर मार्ग की दूरी पांच किमी थी, जिसे उन्होंने डोली पर बैठकर तय किया।
एक दूसरे का हाथ थामकर बहाते रहे आंसू
तीन युद्ध एक साथ लड़ चुके हैं दोनों मित्र
पैरा रेजीमेंट में तैनाती के दौरान दोनों मित्रों का अधिकांश समय एक साथ बीता। दोनों मित्रों ने 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध में भागीदारी की थी। इस दौरान वह अरुणाचल प्रदेश के अलौंग सेक्टर में तैनात रहे। 1965 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय दोनों मित्र अगरतला सीमा पर तैनात थे।