उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत अचानक गांधी पार्क में निरीक्षण के लिए पहुंच गए। गांधी पार्क में शौचालय निर्माण में मुख्य नगर अधिकारी (एमएनए) ने मुख्यमंत्री का आदेश मानते हुए निर्माण के आदेश तो दे दिए, लेकिन नियमानुसार मेयर की मंजूरी नहीं ली तो काम शुरू नहीं हो सका।
अब जब मुख्यमंत्री ने निरीक्षण किया तो निर्माण कार्य शुरू न होने पर भड़क उठे। मुख्य नगर अधिकारी पर गाज गिरते गिरते बची। सूत्रों के अनुसार, एमएनए मुख्यमंत्री कार्यालय को अब यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी इसमें कोई गलती नहीं।
वहीं मेयर विनोद चमोली को इस संबंध में पता चला तो उन्होंने कर्मचारियों को फटकारा की क्यों उन्हें मुख्यमंत्री के आदेश के बारे में अवगत नहीं कराया गया। 22 दिसंबर को मुख्यमंत्री ने मुख्य नगर अधिकारी को फोन पर आदेश दिए था कि तत्काल गांधी पार्क के अंदर शौचालय का निर्माण कराएं।
पर नगर निगम जो भी कार्य करता है उसमें मेयर के साथ बोर्ड की मंजूरी भी लेनी होती है। जब फटकार लगी तो निगम हरकत में आया। मेयर ने मुख्य नगर अधिकारी समेत सभी कर्मचारियों को तलब किया।
उन्होंने मुख्यमंत्री के आदेश को तत्काल पूरा करने के निर्देश दिए। मेयर ने बताया कि वैसे गांधी पार्क में दो शौचालय पहले से है इसलिए तीसरे की जरूरत नहीं है। हमने सुलभ शौचालय प्रबंधन से वार्ता कर ली है, वे दोनों शौचालयों को अपग्रेड करेंगे।
ट्रैक निर्माण में भी लापरवाही
मुख्यमंत्री ने गांधी पार्क में बने पैदल ट्रैक का हाल देखकर भी मुख्य नगर अधिकारी से गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि स्लैब के बीच इतनी चौड़ाई क्यों है। जवाब सुनने से पहले ही उन्होंने लापरवाही न करने की नसीहत दी।
दुर्दशा के लिए सरकार दोषी: मेयर
मेयर विनोद चमोली ने गांधी पार्क की दुर्दशा के लिए सरकार के सिर ठीकरा फोड़ दिया। बताया कि पार्क के सुंदरीकरण को शासन को तीन बार एक करोड़ तीन लाख रुपए का प्रस्ताव भेजा गया लेकिन शासन ने यह मंजूर ही नहीं किया।
नगर निगम ने पिछले साल 15 लाख रुपए खर्च कर पैदल ट्रैक, फव्वारे व चारदीवारी ठीक कराई। बच्चों के लिए गांधी पार्क में देखभाल क्षेत्र बनाया जाना है। एमडीडीए से इसके लिए पैसा मांगा गया था लेकिन नहीं मिला। इस पर मेयर अन्य मद में सुंदरीकरण का प्रस्ताव रखा गया है।