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सिस्टम के पेंच में फंसा सीएम का 'शौचालय'

Sun, 04 Jan 2015 08:52 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत अचानक गांधी पार्क में निरीक्षण के लिए पहुंच गए। गांधी पार्क में शौचालय निर्माण में मुख्य नगर अधिकारी (एमएनए) ने मुख्यमंत्री का आदेश मानते हुए निर्माण के आदेश तो दे दिए, लेकिन नियमानुसार मेयर की मंजूरी नहीं ली तो काम शुरू नहीं हो सका।
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अब जब मुख्यमंत्री ने निरीक्षण किया तो निर्माण कार्य शुरू न होने पर भड़क उठे। मुख्य नगर अधिकारी पर गाज गिरते गिरते बची। सूत्रों के अनुसार, एमएनए मुख्यमंत्री कार्यालय को अब यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी इसमें कोई गलती नहीं।

वहीं मेयर विनोद चमोली को इस संबंध में पता चला तो उन्होंने कर्मचारियों को फटकारा की क्यों उन्हें मुख्यमंत्री के आदेश के बारे में अवगत नहीं कराया गया। 22 दिसंबर को मुख्यमंत्री ने मुख्य नगर अधिकारी को फोन पर आदेश दिए था कि तत्काल गांधी पार्क के अंदर शौचालय का निर्माण कराएं।
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पर नगर निगम जो भी कार्य करता है उसमें मेयर के साथ बोर्ड की मंजूरी भी लेनी होती है। जब फटकार लगी तो निगम हरकत में आया। मेयर ने मुख्य नगर अधिकारी समेत सभी कर्मचारियों को तलब किया।

उन्होंने मुख्यमंत्री के आदेश को तत्काल पूरा करने के निर्देश दिए। मेयर ने बताया कि वैसे गांधी पार्क में दो शौचालय पहले से है इसलिए तीसरे की जरूरत नहीं है। हमने सुलभ शौचालय प्रबंधन से वार्ता कर ली है, वे दोनों शौचालयों को अपग्रेड करेंगे।

ट्रैक निर्माण में भी लापरवाही
मुख्यमंत्री ने गांधी पार्क में बने पैदल ट्रैक का हाल देखकर भी मुख्य नगर अधिकारी से गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि स्लैब के बीच इतनी चौड़ाई क्यों है। जवाब सुनने से पहले ही उन्होंने लापरवाही न करने की नसीहत दी।

दुर्दशा के लिए सरकार दोषी: मेयर
मेयर विनोद चमोली ने गांधी पार्क की दुर्दशा के लिए सरकार के सिर ठीकरा फोड़ दिया। बताया कि पार्क के सुंदरीकरण को शासन को तीन बार एक करोड़ तीन लाख रुपए का प्रस्ताव भेजा गया लेकिन शासन ने यह मंजूर ही नहीं किया।

नगर निगम ने पिछले साल 15 लाख रुपए खर्च कर पैदल ट्रैक, फव्वारे व चारदीवारी ठीक कराई। बच्चों के लिए गांधी पार्क में देखभाल क्षेत्र बनाया जाना है। एमडीडीए से इसके लिए पैसा मांगा गया था लेकिन नहीं मिला। इस पर मेयर अन्य मद में सुंदरीकरण का प्रस्ताव रखा गया है।

आपातकालीन वार्ड में जगह-जगह तोड़फोड़

इससे पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे  अचानक दून अस्पताल के निरीक्षण को पहुंच गए। मुख्यमंत्री ने सीधे आपातकालीन वार्ड का रुख किया। इस वार्ड में जगह-जगह तोड़फोड़ हुई थी।

निर्माण सामग्री भी बिखरी पड़ी थी। इसी जर्जर वार्ड में कुछ मरीज भी भर्ती मिले। इस पर मुख्यमंत्री नाराज हो गए और प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस असवाल से जवाब मांगा। डॉ. असवाल ने बताया कि मेडिकल कालेज के लिए मरम्मत के काम में देरी की वजह से यह स्थिति बनी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीजों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। मरम्मत होने तक दूसरे वार्ड में वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए। निर्माण कार्य में देरी पर चिकित्सा शिक्षा विभाग और उत्तर प्रदेश निर्माण निगम के प्रति भी नाराजगी जताई और कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।

उसके बाद मुख्यमंत्री जनरल वार्ड और फिर न्यूरो वार्ड में पहुंचे। मुख्यमंत्री ने न्यूरो वार्ड को कुछ और विस्तार देने के निर्देश दिए। कहाकि दून अस्पताल में मरीजों को अधिक सुविधाएं देने के प्रयास किए जाएं।

अस्पताल के डॉक्टरों से दवाओं और दूसरी व्यवस्थाओं के बारे में भी पूछा। प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. असवाल ने दवाओं और अन्य मद में समय पर बजट न मिलने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट की कमी से मरीजों को दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।

पैथालॉजी लैब चौबीस घंटे खोलने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अस्पताल में पैथालॉजी लैब और एक्सरे कक्ष को चौबीस घंटे खुला रखा जाए। ताकि मरीजों की जांच समय पर हो और उन्हें निजी अस्पतालों में न जाना पड़े।

प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस असवाल ने शाम को संपर्क करने पर बताया कि शुगर, प्लेटलेट्स की जांच, एक्सरे और सीटी स्कैन चौबीस घंटे करने के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है।

बरामदे में चल रहा मरीजों का इलाज
दून अस्पताल में वार्डों में निर्माण कार्य की वजह से मरीजों को बरामदे में रखा जा रहा है। इमरजेंसी वार्ड में  कुछ मरीजों को इसी टूटे वार्ड में ही भर्ती किया गया है। तो तीन-चार मरीज वार्ड से सटे बरामदे में बेड डालकर भर्ती किए गए हैं।

ठंड में बरामदे में भर्ती मरीजों को और दिक्कत हो रही है। चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आरपी भट्ट का कहना है कि बरामदे के खुली जगहों की तरफ से कांच के शीशे लगाए गए हैं। साथ ही निर्माण एजेंसी को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसी जगह पर हीटर की पर्याप्त व्यवस्था की जाए।

आपातकालीन कक्ष में रहेंगे दो डॉक्टर
अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. आरएस असवाल ने बताया कि मरीजों की परेशानी देखते हुए शाम के वक्त आपातकालीन कक्ष में दो डॉक्टर तैनात किए गए हैं। शाम तीन बजे से रात दस बजे तक दो इमरजेंसी मेडिकल अफसर (ईएमओ) तैनात रहेंगे। आपातकालीन कक्ष में रोजाना औसतन 70 मरीज पहुंचते हैं।

शाम तीन बजे बाद ओपीडी बंद होने की वजह से कक्ष में सामान्य बीमारियों के मरीज भी पहुंचते हैं। इन दिनों सड़क दुर्घटनाओं के मामले भी ज्यादा आते हैं। कक्ष में एक ही डॉक्टर होने से मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता।

विशेषज्ञ की संस्तुति पर ही रेफर
आपातकालीन वार्ड से बिना विशेषज्ञ डाक्टर की संस्तुति के किसी भी मरीज को बड़े अस्पताल नहीं भेजा जाएगा। प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक ने शनिवार को इसके लिखित आदेश जारी किए।

पिछले दिनों आपातकालीन वार्ड से बेवजह मरीजों को शहर के एक बड़े निजी अस्पताल भेजे जाने का मामला सामने आया था। प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक ने कहा कि जो इलाज या जांच दून अस्पताल में उपलब्ध है, वह मरीज को उपलब्ध कराया जाए। अगर जरूरी हुआ तभी मरीज को बड़े अस्पताल भेजा जाएगा या फिर मरीज के परिजन खुद दूसरे अस्पताल ले जाना चाहें।

बाल वनिता आश्रम : 21 लाख रुपए की मदद

शाम साढ़े तीन बजे मुख्यमंत्री हरीश रावत तिलक रोड स्थित श्री श्रद्धानंद बाल वनिता आश्रम पहुंचे।

यहां बच्चों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किए। आश्रम की प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों ने भवन के विस्तार के लिए आर्थिक मदद की जरूरत बताई। इस पर मुख्यमंत्री ने 21 लाख रुपए और सभी बच्चों को ड्रेस देने की घोषणा की।

बच्चों को फल, मिठाई और गर्म कपड़े भी बांटे। इस अवसर पर विधायक प्रदीप बत्रा, मुख्यमंत्री के मीडिया समन्वयक राजीव जैन, जसवीर सिंह रावत, ओएसडी अरुण कुमार, सलाहकार डा. संजय चौधरी, आश्रम के अधिष्ठाता ओम प्रकाश नांगिया, डा. आईएस पाल आदि उपस्थित थे।

मूल निवास की समस्या
पदाधिकारियों ने कहा कि आश्रम के बच्चे डाक्टर और इंजीनियर भी बने हैं। लेकिन कई बार मूल निवास की समस्या से सरकारी नौकरी में दिक्कत आती है। मुख्यमंत्री इस दिक्कत के बारे में विचार-विमर्श कर कोई फैसला लेने का आश्वासन दिया है।

अधिकारी भी करें निरीक्षण
मीडिया द्वारा पर्वतीय जिलों में निरीक्षण के बारे में पूछने पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि ‘मेरे निरीक्षण सांकेतिक हैं। मैं सभी जगह नहीं जा सकता लेकिन अधिकारियों को संदेश देना चाहता हूं कि वे भी व्यवस्थाएं जांचने के लिए समय-समय पर निरीक्षण करें।’

गैरहाजिर होने पर मांगा स्पष्टीकरण
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को शहर के विभिन्न इलाकों का दौरा किया, लेकिन वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। शनिवार को मुख्य नगर अधिकारी ने वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा।

ड्यूटी में कई घंटे देरी से पहुंचने पर सहायक संभागीय अधिकारी (प्रशासन) ने छह कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने बताया अगर स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए गए तो कठोर कार्रवाई होगी।
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श्रीमती सीएम भी बेटियों संग दौरे पर

मुख्यमंत्री के बाद शनिवार को उनकी पत्नी रेणुका रावत बेटियों अनुपमा और आरती के साथ केदारपुरम स्थित नारी निकेतन और शिशु सदन पहुंची। उन्होंने संवासिनियों और बच्चों का हाल जाना और मिठाई, कंबल और साड़ियां बांटी।

शनिवार दोपहर डेढ़ बजे नारी निकेतन पहुंची रेणुका रावत ने पहले मुख्य इमारत में संवासिनियों का हाल जाना। उनकी बेटी आरती ने डेढ़ महीने की बच्ची पूर्णिमा को बोतल से दूध पिलाया। रेणुका ने यहां गुमसुम बैठी रुद्रप्रयाग निवासी रुकमा से बातचीत की और उसका इलाज कराने का वादा किया।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से बात कर नारी निकेतन की हरसंभव मदद की जाएगी। वे नारी निकेतन प्रभारी सरला रावत की व्यवस्थाओं से संतुष्ट नजर आईं।
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