6 मार्च 2017 में आईएनएस विराट को सैन्य बेड़े से अलग करने के बाद इस पोत से संचालित हो रहे युद्ध विमान को अलग किया गया। उन्होंने ही एडमिरल लांबा से इस विमान को रेजीमेंट मुख्यालय लैंसडौन में स्थापित करने का अनुरोध किया था, जिसे उन्होंने स्वीकार किया। उन्होंने रेजीमेंट की ओर से उनका आभार जताया। इस मौके पर जीआरआरसी के कमान अधिकारी ब्रिगेडियर इंद्रजीत चटर्जी, डिप्टी कमांडेंट कर्नल शलभ सनवाल, सेंटर एसएम त्रिलोक सिंह सहित नौसेना तथा थल सेना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
क्या है बम वर्षक विमान सी हैरियर
2 फरवरी, 1990 में यह युद्ध बम वर्षक विमान सी हैरियर आइएनएस विराट के साथ जुड़ा। तब से इसका संचालन भी विराट के साथ किया जाता रहा। यह नेवी का बर्टिकल शोर्ट टेक ऑफ एंड लैंडिग उड़ान भरने वाला जहाज है। यह पहला ऐसा बम वर्षक विमान है, जिसका आसमान, जमीन, समुद्र तीनों जगह दुश्मनों के युद्ध लड़ाकों पर मार करने में प्रयोग किया जाता रहा। यह रायल नेवी में अप्रैल, 1980 में शामिल हुआ। ब्रिटिश सेना के इस विमान को 16 दिसंबर, 1983 को नेवी की हवाई विंग हंसा आईएनएस में शामिल किया गया। वर्ष 1987 में नौसेना ने सी हैरियर विमान को ब्रिटिश सेना से खरीद लिया।
20 फीट लम्बाई के एक सीटर वाले इस विमान का वजन 12 टन का था। एडमिरल अरूण प्रसाद इसके पहले पायलट थे। उनके साथ तकनीशियन विमल प्रसाद थे। लैंसडौन में स्थापना के दौरान इसका वजन मात्र 5 टन रखा गया है। इस विमान को गोवा से कोटद्वार लाने में 3 दिन का समय लगा। कोटद्वार से लैंसडौन लाने में देहरादून से एक ट्रेकर बुलाना पड़ा। पहाड़ी रास्ता होने के कारण कोटद्वार से लैंसडौन लाने में चार दिन का समय लग गया।