फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हास्टल में छात्र की मौत मामले में बिठाई जांच

Thu, 11 Dec 2014 12:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, त्यूनी
विज्ञापन
विज्ञापन
देहरादून के त्यूनी स्थित बिनसोन स्थित सरकारी आवासीय विद्यालय में छात्र की मौत मामले को गंभीरता से लेते हुए जनजातीय कल्याण निदेशक सुशील कुमार ने जांच बैठा दी है। जांच का जिम्मा संयुक्त निदेशक योगेंद्र सिंह रावत को सौंपा गया है।
विज्ञापन


चकराता से करीब 40 किमी दूर बिनसोन स्थित आश्रम पद्धति विद्यालय में मंगलवार को बुखार से पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले दिनेश पुत्र पूरचंद निवासी पिंगुवा गांव की मौत हो गई थी। मौत का कारण बच्चे को सही समय पर उपचार न मिलना बताया जा रहा था।

मामला प्रकाश में आने के बाद जनजातीय कल्याण निदेशक ने मामले में जांच बैठा दी है। उन्होंने बताया कि 02 दिन के भीतर संयुक्त निदेशक मुझे रिपोर्ट देंगे। जांच में दोषी पाए जाने वाले को बक्शा नहीं जाएगा।
विज्ञापन


अभिभावकों ने दी तहरीर
छात्र की मौत से गुस्साए परिजनों ने प्रबंधन के खिलाफ राजस्व पुलिस को तहरीर दी है। तहरीर में दिनेश के पिता पूरचंद ने कहा कि शिक्षकों और स्टाफ की लापरवाही के चलते उसके बेटे की मौत हुई है।

तहरीर में कहा कि यदि समय रहते तबीयत खराब होने की जानकारी मिल जाती तो वह दिनेश का सही ढंग से इलाज करा पाते। हालत अत्यधिक खराब होने के बाद उन्हें इसकी जानकारी दी गई। एसडीएम अशोक कुमार पांडे ने कहा मामले की जांच की जा रही है।

बुखार के साथ ही पेट में भी था दर्द

प्रभारी प्रधानाचार्या मालती विजयलक्ष्मी ने बुधवार को स्कूल पहुंच कर छात्रों और प्रभारी अधीक्षक कृष्णलाल से पूछताछ की। जांच में पता चला कि सोमवार शाम से ही दिनेश की हालत ठीक नहीं थी।

मंगलवार की सुबह उसने पेट में दर्द होने की शिकायत भी वार्डन के साथ ही प्रभारी अधीक्षक से की थी। लेकिन प्रभारी अधीक्षक ने उसे अस्पताल ले जाने के बजाय पेट दर्द की गोली देकर आराम करने की नसीहत दे डाली। जिसके बाद उसकी तबियत ओर भी खराब होती चली गई और परिजनों द्वारा मंगलवार को अस्पताल ले जाते वक्त छात्र ने रास्ते में दम तोड़ दिया।

डरे सहमे हैं छात्र
दिनेश की मौत से उसके सहपाठी अब भी सदमें में है। बुधवार को अमर उजाला के संवाददाता ने छात्रों से फोन पर बात करना चाहा तो वह ठीक से हेलो तक नहीं बोल सके जबकि, पीछे से शिक्षक उन्हें कोई निर्देश देते सुनाई पडे़। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि स्कूल प्रबंधन छात्रों को मामले में मैनेज करने जुट गया है।
विज्ञापन

नहीं रखा जाता छात्रों की सेहत का ख्याल

भले ही जनजातीय क्षेत्र के बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए क्षेत्र में आश्रम पद्धति विद्यालय स्थापित किए गए हो। लेकिन रिपोर्ट बताती है कि इन स्कूलों में छात्रों की सेहत का ढंग से ख्याल नहीं रखा जाता।

तत्कालीन राज्य मंत्री खजान दास, एसडीएम ईला गिरी और मोहन सिंह बर्निया के निरीक्षण में भी यह बात सामने आ चुकी है। इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सेहत के नाम पर प्रति माह 2070 रुपये प्रति बच्चा स्कूल प्रबंधन को मिलता है। लेकिन इसकी एवज में छात्रों को एक ही तरह का भोजन रोजाना परोसा जाता है।

जबकि, नियमानुसार रोजाना हर दिन अलग-अलग तरह के मैन्यू परोसने का प्राविधान है। इसी के साथ निरीक्षण में कई बार इन स्कूलों में गंदगी पसरे रहने की बात भी उजागर हो चुकी है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें