महंगाई ने लोगों को अब धार्मिक अनुष्ठानों से भी दूर कर दिया है। घर में धूमधाम से होने वाले आयोजन अब लोग चाहकर भी नहीं करा पाते, वजह इनमें होने वाला खर्च है। इसके लिए भी लोगों ने अब शॉर्टकट फार्मूला ढूंढ निकाला है।
लोगों की मानें तो आवश्यक आयोजनों में कटौती के साथ ही समय-समय पर घरों में होने वाले अनुष्ठानों पर अंकुश लग गया है। अलबत्ता मंदिरों में ही पूजा-अर्चना से काम चलाया जा रहा है।
कुछ यूं निकाला शॉर्टकट
घरों में महामृत्युंजय जाप जैसा अनुष्ठान अब संभव नहीं रहा। इस जाप के सूक्ष्म का बजट भी अब 20 हजार से कम नहीं आता। ऐसे में जाप अब खुद ही कर लेते हैं। यही नहीं बच्चों के जन्मदिन पर भी हर साल ग्रहों का पूजन कराते थे। लेकिन महंगाई ने इस कदर बेहाल कर दिया है कि अब खुद ही बच्चों का जन्मदिन पूजना पड़ रहा है। पूजन की दक्षिणा किसी मंदिर में दे दी जाती है। अरविंद गार्गी, कुंज विहार, कारगी चौक
जाप भी घर पर
अक्सर राशि में खराब चल रहे ग्रहों का पूजन घर पर कराया करते थे। अपने घर में अनुष्ठान हो, घर पवित्र यह कौन नहीं चाहता। घर में आयोजनों की तो बात ही अलग होती है। इसके लिए 10 से 11 दिनों का जाप भी घर पर होता था। इस बीच महंगाई के बढ़ते ही इस पर 20 से 30 हजार तक खर्च होने लगा है। अब मंदिर में जाकर ही पंडित जी से पूजन करा लेते हैं जो पांच हजार तक में हो जाता है। बड़ी पूजा की जगह अब दान आदि कर सूक्ष्म रूप में ही सब कुछ निपटाना पड़ रहा है। सुषमा रमोला, निवासी खुड़बुड़ा
अब लोग फोन करके सीधे यही पूछते हैं कि हमें ग्रह दोष का पूजन कराना है या कोई और धार्मिक आयोजन आप यह बताइए कि कम से कम खर्च में हम इसे कैसे कर सकते हैं? धार्मिक आयोजन में होने वाले खर्च को कम करने पर तो लोगों का जोर रहता ही है साथ में समय की कमी के चलते लोग आयोजन भी सूक्ष्म रूप में कराना चाहते हैं। आचार्य भरत राम तिवारी, उपाध्यक्ष, उत्तराखंड विद्वत सभा
लोगों के घरों में लंबे समय से कर्मकांड करा रहा हूं। इसके साथ ही मंदिर में भी पुजारी हूं। पहले मंदिर का पूजन निपटाने के बाद घरों में धार्मिक आयोजन कराने जाता था। अब लोग घर पर आयोजन ना कराकर सीधे मंदिर ही पहुंच जाते हैं। घरों में रूद्राभिषेक, देवी पूजन आदि कराने में काफी खर्च हो जाता है तो अब लोग मंदिर में ही यह सब निपटा लेते हैं और मर्जी से दक्षिणा दे देते हैं। पंडित भगवती प्रसाद थपलियाल