उत्तराखंड में संचालित छोटी बड़ी औद्योगिक इकाइयों की बिजली कटौती होने पर विभाग की ओर से मुआवजा दिया जाएगा।
सरकार इस संबंध में कानून बनाने जा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव ने इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया है। सरकार की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद ऊर्जा विभाग के अफसर कानून का मसौदा तैयार करने में भी जुट गए है। यदि इसे कानून का अमलीजामा दे दिया जाता है तो जहां एक तरफ कंपनियों को फायदा मिलेेगा वहीं बिजली विभाग की मुसीबतें बढ़ने वाली है।
उद्योगों को संचालित करने के लिए 24 घंटे बिजली आपूर्ति चाहिए। सरकार और ऊर्जा निगम के अफसर उद्योगों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति करने में नाकाम रहे हैं। वर्ष 2003 में औद्योगिक नीति लागू करते समय सरकार ने उद्योगों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति का वायदा किया था, लेकिन हकीकत सबके सामने है। यही कारण है कि उद्योगों का पलायन शुरू हो गया। अब सरकार उद्योगों का पलायन रोकने के लिए बिजली कानूनों में बदलाव करने जा रही है।
सरकार की ओर से प्रस्तावित कानूनों के मुताबिक उद्योगों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। यदि ऊर्जा निगम ऐसा करने में नाकाम रहा तो ऊर्जा निगम इसके एवज में मुआवजे का भुगतान करना होगा। मुख्य सचिव शत्रुघभन सिंह ने 23 फरवरी को इस संबंध में ऊर्जा विभाग को निर्देश भी जारी कर दिया है।
मुख्य सचिव के निर्देश पर ऊर्जा विभाग के अफसर कानून का मसौदा तैयार करने में भी जुट गए हैं ताकि इसे एक अप्रैल से पहले लागू किया जा सके। मुख्यमंत्री हरीश रावत पहले ही इस बात का एलान किया है कि आगामी एक अप्रैल से उद्योगों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जाएगी। प्रस्तावित कानून से ऊर्जा निगम की मुसीबतें बढ़ने वाली हैं।