शारदा द्वीप पर गश्त करने के लिए वन विभाग ने नदी को पार करने को पहले मोटर बोट पर विचार किया, लेकिन शारदा नदी के तल में विशाल शिलाखंड होने से नाव के ब्लेड टूटने का खतरा था।
गश्त के बाद नाव को सुरक्षित रखने की भी समस्या थी। मोटर बोट के संचालन की लागत भी अधिक आ रही थी। इसे देखते हुए हवा वाली नाव को अधिक सुविधाजनक माना गया। इस नाव की विशेषता यह है कि इसमें गश्त करने के बाद हवा निकाल दी जाती है और उसे रेंज कार्यालय में भी सुरक्षित रखा जा सकता है।
कर्मचारियों को दिया जा रहा है प्रशिक्षण
हल्द्वानी वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी कुंदन कुमार ने बताया कि वन कर्मियों को नाव संचालित करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस नाव में एक बार में सात से आठ कर्मचारी गश्त को जा सकते हैं। कर्मचारियों को सुरक्षा के लिए लाइफ जैकेट, हेलमेट, घुटने और कोहनी के बैंड आदि दिए जाएंगे।