यदि सूचना आयोग में मामला न जाता तो इंदिरा आवास योजना का सच बाहर न आता। इस योजना के तहत उसको भी मकान बनाने का पैसा मिला जिसके पास दो-दो पक्के मकान पहले से ही है।
मामला हरिद्वार के बहादराबाद का है। नूर अहमद ने ग्राम पंचायत विकास अधिकारी कुलदीप सैनी, भगतनपुर आबिदपुर के ग्राम प्रधान और खंड विकास अधिकार पर आरोप लगाते हुए शिकायती पत्र दिया था जिसमें कहा गया था कि मिलीभगत से अपात्र व्यक्तियों को इंदिरा विकास योजना के तहत आवास आवंटित किया गया है।
राज्य सूचना आयोग में पहुंचा मामला
बाद में नूर अहमद ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत इस संबंध में जानकारी मांगी। नूर अहमद को इसकी कोई जानकारी नहीं मिली तो मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंचा। राज्य सूचना आयुक्त अनिल कुमार शर्मा ने मामले की सुनवाई करते हुए संबंधित विभागों से स्पष्टीकरण मांगा।
संबंधित लोक सूचना अधिकारी ने बताया कि इस मामले की जांच पंचायती राज निदेशालय के कहने पर हरिद्वार डिप्टी कलेक्टर से कराई गई।
न आवास बना, न शौचालय
आयोग के सामने रखी गई जांच रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया कि इंदिरा आवास योजना के तहत उन लोगों को भी मकान बनाने का पैसा दिया गया जिनके पास पहले से ही दो-दो पक्के मकान थे।
इंदिरा आवास योजना के तहत दिए गए पैसे से न तो आवास ही बनाया गया और न ही शौचालय का निर्माण किया गया। हद तो यह हुई कि जांच रिपोर्ट की जानकारी भी शिकायतकर्ता को आयोग के निर्देश के बाद दी गई।