सीमांत गांवों में गेहूं पहुंचाने के लिए प्रशासन को वायु सेना के हेलीकॉप्टर का इंतजार है। प्रशासनिक अधिकारियों की माने तो हेलीकॉप्टर मिलते ही तीन-चार दिन में गेहूं पहुंचा दिया जाएगा। मालूम हो कि अमर उजाला ने रविवार के अंक में ‘पिथौरागढ़ के सीमांत गांवों के लोग खा रहे चीन का राशन’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद ही प्रशासन हरकत में आया है।
डीएम सी रविशंकर ने बताया कि कुटी और गुंजी में नवंबर तक चावल बांटा गया है। रौंककौंग, नाभि, गर्ब्यांग में अगस्त तक का चावल बांटा है। इन गांवों में अभी 70 क्विंटल गेहूं भेजना है। इसके लिए वायुसेना के हेडक्वार्टर को पत्र लिखा है। यदि हेलीकॉप्टर सेवा मिली तो अगले तीन-चार दिन के भीतर चावल पहुंचा दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि व्यास घाटी में 173 क्विंटल गेहूं सितंबर तक का और 294 क्विंटल चावल नवंबर तक का पहुंचाया गया है। उधर, जिला पूर्ति अधिकारी मनोज बर्मन ने बताया कि अभी 15 क्विंटल गेहूं गुंजी गोदाम में है। ऊपरी क्षेत्र के लोग दाल, नमक, तेल, मसाले आदि खाद्य सामग्री को खुले बाजार से उपलब्ध कराने की मांग कर रहे है।
नजंग और लखनपुर में रास्ता खराब होने से सीमांत के प्रहरियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऊपरी क्षेत्र में लोग चीन के चावल और रिफाइंड तेल पर निर्भर हैं। ग्रामीणों को राज्य खाद्य योजना में पांच किलो गेहूं और ढाई किलो चावल मुहैया कराया जाता है। ग्रामीण 10-10 किलो गेहूं और चावल उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।