-स्वार्ड ऑफ ऑनर- बटालियन अंडर ऑफिसर आकाशदीप सिंह ढिल्लो
-स्वर्ण पदक- एकेडमी अंडर आफिसर शिव कुमार चौहान
-रजत पदक -एकेडमी कैडेट एज्युडेंट सक्षम राणा
-कांस्य पदक-सीनियर अंडर आफिसर सूरज सिंह
-रजत पदक (टीजीसी)-जूनियर अंडर आफिसर भरत योगेन्द्र
-श्रेष्ठ विदेशी कैडेट-दोन वॉन सोन (वियतनाम)
-सीआईएस बैनर-केरेन व सिंगढ़ कंपनी
आईएमए में हर छह माह बाद होने वाली पासिंग आउट परेड में छोटे-छोटे बदलाव होते रहते हैं, लेकिन इस बार वैश्विक महामारी कोविड-19 ने वर्षों पुरानी परंपरा को ही बदल दिया। पीओपी के इतिहास में यह पहली बार देखने को मिला जब युवा सैन्य अधिकारी ड्रिल स्क्वायर पर मास्क पहने परेड करते नजर आए। वह भी बिना अपने माता-पिता और सगे संबंधियों के।
परिजन आमंत्रित न होने के कारण यह भी पहली बार हुआ जब सेना प्रमुख, आईएमए कमांडेंट, प्रशिक्षकों और यूनिट कमांडरों ने युवा सैन्य अधिकारियों के कंधों पर पीप्स सजाए। अंतिम पग के साथ ही पहला पग की परंपरा भी पासिंग आउट परेड में पहली बार शुरू हुई। कोरोना का असर इस बार पासिंग आउट परेड में साफ देखने को मिला। अब तक परेड की शान देखते ही बनती थी।
भारत माता तेरी कसम, कदम-कदम बढ़ाए जा और सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा के गीत पर गर्व से सीना ताने युवा अफसर ऐतिहासिक चैटबुड बिल्डिंग के ड्रिल स्वायर पर जब कदमताल करते थे, तब वहां उपस्थित बड़ी संख्या में कैडेट के माता-माता, नाते-रिश्तेदार तालियों से जोरदार स्वागत करते थे। बुलंद हौसलों को लिए जब यह उनके सामने से गुजरते थे तब माता-पिता का सीना भी गर्व से और चौड़ा हो जाता था।
युवा सैन्य अधिकारी अंतिम पग भरते थे तो उन पर सेना के हैलीकॉप्टर पुष्प वर्षा करते थे। वह माहौल बेहद आनंदित करने वाला होता था, लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। जिन कुर्सियों पर माता-पिता, नाते-रिश्तेतार अपने लाडलों को देखकर गौरवान्वित होते थे वह पूरी तरह खाली थी। उन पर सेना के अफसर और उनके परिजन उपस्थित रहे। इस बार अंतिम पग भरने के दौरान पुष्प वर्षा भी नहीं हुई।
पहली बार शुरू हुई अंतिम पग के बाद पहला कदम की परंपरा
कोराना ने जहां इस बार भारतीय सैन्य अकादमी की वर्षों पुरानी परंपरा बदली, वहीं इस बार एक नई परंपरा की नींव भी पड़ी। हर बार कैडेट अंतिम पग पार कर भारतीय सेना के लिए अग्रसर होते थे। लेकिन इस बार अंतिम पग, पीपिंग और ओथ के बाद कैडेटों को पहला कदम से भी गुजरना पड़ा। यह पासिंग आउट परेड के इतिहास में पहली बार हुआ जब युवा सैन्य अधिकारी अंतिम पग के बाद पहले कदम से गुजरे। अब तक अंतिम पग के बाद कुछ दिन अवकाश लेकर कैडे्ट अपनी यूनिट ज्वाइन करते थे। लेकिन, इस बार युवा सैन्य अफसर सीधे अपनी-अपनी यूनिट जाएंगे।