भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का किसान महाकुंभ कई प्रस्ताव पास करने के साथ ही खत्म हो गया। यूनियन ने पहाड़ से बढ़ते पलायन को देश के लिए खतरा बताया।
पलायन रोकने के लिए ठोस नीति बनाने की मांग को लेकर यूनियन उत्तराखंड के सभी जिलों में आगामी नौ अगस्त को चक्काजाम करेगी। इसके अलावा सभी फसलों की कीमत दोगुनी करने और किसान आयोग के गठन की भी मांग की गई। किसानों का नौ सूत्री मांग पत्र प्रधानमंत्री के नाम और 11 सूत्री मांग पत्र मुख्यमंत्री के नाम सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा गया।
तीन दिन चले किसान कुंभ के अंतिम दिन पहले किसान यूनियन की कार्यकारिणी की बैठक लालकोठी में हुई, इसके बाद रोड़ी बेलवाला में महापंचायत का आयोजन किया गया। कार्यकारिणी में किसानों के हित में कई प्रस्ताव पारित किए गए। महापंचायत को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि किसानों को अब देश की राजनीति के बारे में भी सोचना होगा।
उन्होंने कहा कि यदि अपने हितों का संरक्षण करने वाली सरकार बनानी है तो किसानों को वोट डालने में भी एकजुटता दिखानी होगी। वोट डालते समय हम एकजुटता नहीं दिखाते, इसका लाभ राजनीतिक दल उठाते हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों पर किसानों की उपेक्षा का आरोप लगाया। राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने एलान किया कि किसान यूनियन समय-समय पर अब पर्वतीय क्षेत्रों में भी पंचायतें करेगी।
जंगली जानवरों से फसल बचाने को बने प्लान
प्रधानमंत्री को भेजे गए नौ सूत्री ज्ञापन में जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान को बड़ी समस्या बताते हुए इसके लिए वृहद कार्ययोजना बनाने की मांग की गई।
किसान यूनियन ने किसान आयोग का गठन करने, फसल बीमा योजना में एक किसान को एक इकाई मानने, बकाया गन्ना भुगतान व जैव परिवर्तित फसलों के उत्पादन पर रोक लगाने की मांग की। किसान कुंभ में केंद्र की मोदी सरकार के दो साल के कार्यकाल से भी किसान असंतुष्ट दिखे।
Published By: Nirmala Suyal