सेना अब उत्तराखंड के चीन और नेपाल से सटे सीमांत इलाकों के बार्डर एरिया डेवलपमेंट प्लान (बीएडीपी) में भागीदारी चाहती है।
सामरिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण पांच जनपदों पिथौरागढ़, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और उत्तरकाशी में सुनियोजित विकास की रूपरेखा तय करने में सेना मदद करेगी। सेना के लखनऊ स्थित मध्य कमान ने यह प्रस्ताव सरकार को भेजा है। सीमांत क्षेत्रों में सेना मानव रहित विमानों के लिए एयरबेस बनाना चाहती है। नैनीसैनी (पिथौरागढ़) और पंतनगर में 100 एकड़ भूमि सेना को चाहिए। सेना और शासन के बीच गुरुवार को इन मुद्दों पर चर्चा भी होगी।
बीएडीपी के तहत केंद्र सरकार सीमांत क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, खेल, शिक्षण संस्थान आदि विकसित के लिए वार्षिक बजट देती है। सेना अब इस मद में मिलने वाले बजट के जिन विकास योजनाओं पर खर्च होना है उसके लिए सहयोग देगी। सीमांत क्षेत्रों में आबादी को टिकाए रखने के लिए वहां मूलभूत सुविधाएं दिए जाने की आवश्यकता है।
सिविल आबादी से तालमेल बढ़ाने के लिए सेना विकास कार्यों में भागीदारी करना चाहती है। स्थानीय लोगों से बार्डर पार पर होने वाली गतिविधियों की सूचनाएं लेने के लिए तालमेल आवश्यक है। सेना ने उत्तराखंड सरकार से गतिमान बीएडीपी प्रोजेक्ट्स में भी उन्हें शामिल करने की बात कही है।
उधर, सेना के सहयोग से सरकार को भी निर्माण संबंधी कार्यों को जल्द और बेहतर ढंग से करवाने में मदद मिलेगी। सिविल मिलिट्री लाइजनिंग कान्फ्रेंस की स्टीरिंग कमेटी में शामिल सैन्य अधिकारियों और शासन के बीच बुधवार को बीएडीपी सहित वन भूमि हस्तांतरण के विभिन्न प्रस्तावों को लेकर बैठक होगी।
उत्तराखंड का बीएडीपी प्लान
वर्ष 2012 - 33.65 करोड़
वर्ष 2013- 35.65 करोड़
वर्ष 2014 - 10.86 करोड़
वर्ष 2015 - 20.79 करोड़
100 एकड़ पर बनना है यूएवी बेस
सेना सीमांत क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ाने के लिए मानव रहित विमानों के तीन एयरबेस बनाना चाहती है। उत्तराखंड में पंतनगर और नैनीसैनी तथा यूपी सीमा पर छुटमलपुर को इसके लिए सेना ने सामरिक लिहाज से उपयुक्त माना है। एयरबेस निर्माण के लिए 100 एकड़ भूमि सेना को इन क्षेत्रों में चाहिए। प्रस्ताव को वर्ष 2012 में उठाया था लेकिन भूमि हस्तांतरण में पेच फंसा हुआ है। सेना नए सिरे से प्रस्ताव को प्रदेश सरकार के समक्ष रखा है।