देहरादून के क्लेमेंटटाउन कैंट में सेना ने अपनी भूमि से गुजरने वाले अस्थाई मार्गों को बंद कर दिया है।
जिन क्षेत्रों से यह मार्ग गुजर रहे थे वहां पर सेना ने तार बाड़ लगाकर उसे बंद कर दिया है। सेना की कार्यवाही से प्रभावित क्षेत्रों के लोगों ने छावनी बोर्ड के उपाध्यक्ष भूपेंद्र कंडारी सहित सभासदों से रोष व्यक्त किया है।
पढ़ें, देहरादून के इस स्कूल में पढ़ेगी गांधी परिवार की बेटी
गौरतलब है कि एक बरस पहले सेना ने अस्थाई मार्ग बंद करने का फैसला लिया था, जिसका विरोध होने पर स्थानीय प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग बनने तक सेना से रास्ते बंद नहीं करने का अनुरोध किया था।
छावनी परिषद के वार्ड 5 और 7 के छोटा भारूवाला, ओसले लाइन, सैनिक विहार एवं डकौटा क्षेत्र में सेना ने अस्थायी कच्चे मार्गों को तार बाड़ लगाकर बंद कर दिया है।
जिला प्रशासन ने मामले में किया हस्तक्षेप
सेना ने सुरक्षा कारणों के चलते ए 1 श्रेणी की भूमि से गुजरने वाले सभी अस्थाई सिविल मार्ग बंद कर दिए हैं। फरवरी 2013 में सेना ने यह कवायद शुरू की थी, लेकिन स्थानीय जनता के विरोध के चलते जिला प्रशासन ने मामले में हस्तक्षेप किया।
पढ़ें, एनडी तिवारी से परेशान हैं कांग्रेस आलाकमान
जिलाधिकारी देहरादून बीवीआरसी पुरुषोतम ने सेना के स्टेशन कमांडर ब्रिगेडियर संजय कुमार अहुजा से मिलकर रास्ते बंद नहीं करने का अनुरोध किया था।
मार्ग की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया था
प्रशासन की तरफ से ऐसे क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया था, लेकिन एक वर्ष से भी अधिक समय बीत जाने पर कोई भी स्थायी निराकरण नहीं किया गया।
अब सेना की कार्यवाही से सैंकड़ों परिवार प्रभावित होंगे जो बंद किये कच्चे मार्गों का प्रयोग करते हैं।
उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह कंडारी ने कहा कि पिछले वर्ष मार्च 2013 में मुद्दों को उठाया लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला जिसके चलते सेना ने तारबंदी कर दी है।
कंडारी ने कहा कि सीईओ छावनी परिषद अजीथ रेड्डी से मिलकर मामले को सुलझाने के लिए सेना से वार्ता करने के लिए मांग की गई है।
जनता के पास नहीं है कोई रास्ता
क्लेमेंटटाउन कैंट में ओसले लाइन और डकोटा में सैन्य भूमि पर सड़कों के निर्माण के प्रस्ताव को सेना ने फरवरी 2013 में खारिज कर दिया था।
सैनिक विहार कॉलोनी में वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था तो है लेकिन अन्य दो क्षेत्रों में आने जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है।
पढ़ें, सपा का ये कार्ड खत्म करेगा मोदी की लहर का असर!
स्टेशन कमांडर ब्रिगेडियर एसके अहूजा ने 22 फरवरी को कैंट बोर्ड सहित जिला प्रशासन को तीन माह का अल्टीमेटम दिया था कि ए 1 श्रेणी भूमि पर बने सिविल मार्गों को बंद किया जाएगा।
वैकल्पिक मार्ग के लिए जिला प्रशासन को भूमि अधिग्रहण के लिए प्रस्ताव भेजने थे, लेकिन उसपर भी अमल नहीं हुआ। जिन क्षेत्रों में तार बाड़ किया गया है वहां वैकल्पिक मार्ग नहीं है।
ऐसे में बरसों से इस्तेमाल होने वाले मार्ग बंद होने से लोगों के पास आने जाने के लिए कोई रास्ता नहीं बचा है। प्रस्तावित केएलपी होने के चलते सेना अतिक्रमण हटा रही है।
सड़क मार्ग नहीं होने से सेना ने इन क्षेत्रों में भवन निर्माण मानचित्रों पर भी रोक लगाने का सुझाव कैंट बोर्ड को दिया है।
मंत्री की पहल नहीं आई काम
नियोजन मंत्री दिनेश अग्रवाल ने क्लमेंटटाउन कैंट में वैकल्पिक मार्ग तलाशने के निर्देश जिला प्रशासन को दिए थे। मंत्री ने 18 मार्च को जिलाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों की बैठक बुलाकर स्थायी हल तलाशने को कहा था।
पढ़ें, 'गुजरात बने न बने, लेकिन मोदी बन गए हैं मॉडल'
सीईओ कैंट, एडीएम और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर सिविल मार्गों पर रिपोर्ट तैयार होनी थी।
वैकल्पिक मार्ग की संभावना और प्राक्कलन तैयार करने का जिम्मा लोक निर्माण विभाग को दिया गया था। लेकिन, यह कवायद धरी रह गई।
अब यह हैं विकल्प
- सैनिक विहार कॉलोनी के लिए राजस्व अभिलेखों में एक मार्ग है, जिसे सेना से वार्ता कर जिला प्रशासन दोबारा चालू करवा सकता है।
- ओसले लाइन और डकोटा में सिविल मार्ग बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जिला प्रशासन की मदद से हो सकती है।