लक्ष्य सेन के दादा सीएल सेन को अल्मोड़ा में बैडमिंटन का भीष्म पितामह कहा जाता है। उन्होंने कुछ दशक पहले अल्मोड़ा में बैडमिंटन की शुरुआत की और आज एक से बढ़कर एक खिलाड़ी अल्मोड़ा से निकलकर देश और दुनिया के पटल पर छा रहे हैं। लक्ष्य का अगला लक्ष्य ऑल इंग्लैंड टूर्नामेंट है जो मार्च में होना है।
डीके सेन के बेटे लक्ष्य सेन ने रविवार को अपना पहला वर्ल्ड टाइटल जीतकर अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। यूनेक्स सनराइज इंडिया ओपन-2022 के फाइनल मुकाबले में लक्ष्य सेन ने सिंगापुर के खिलाड़ी लोह केन यू को 24-22 और 21-17 के अंतर से शिकस्त देकर खिताब अपने नाम किया। लक्ष्य सेन को उसकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए उनके पिता डीके सेन ने दिन रात एक कर दिया।
डीके सेन ने अपने दोनों बेटों को बेहतर बैडमिंटन खिलाड़ी बनाने के लिए अल्मोड़ा तक छोड़ दिया और बेंगलुरु चले गए। हालांकि अल्मोड़ा से उनका रिश्ता अब भी है और हाल ही में लक्ष्य ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में जब कांस्य पदक जीता तो पूरा परिवार यहां आया और शहरवासियों ने उनका जोरदार स्वागत किया था।
जाने-माने कोच हैं डीके सेन
लक्ष्य के पिता डीके सेन बैडमिंटन के जाने-माने कोच हैं और वर्तमान में प्रकाश पादुकोण अकादमी से जुड़े हैं। पिता की देखरेख में लक्ष्य ने होश संभालते ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया और वह चार साल की उम्र से स्टेडियम जाने लगे। छह-सात साल की उम्र में ही लक्ष्य का खेल और उसकी प्रतिभा हर किसी को हैरान करती थी। 2018 में लक्ष्य ने जूनियर एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप अपने नाम की थी। अब उन्होंने अपना पहला वर्ल्ड टाइटल जीता है। इससे पहले उनकी अगुवाई में पिछले महीने स्पेन में वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी कांस्य पदक जीता था। लक्ष्य ने पिता और कोच डीके सेन की अगुआई में लगातार दूसरा पदक जीता है।