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जलवायु परिवर्तन के खतरे से बचाने वाले उपाय की उपेक्षा

Wed, 02 Dec 2015 03:58 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
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जलवायु परिवर्तन के खतरों और कार्बन डाई ऑक्साइड को खपाने में अहम योगदान देने वाले जिस सबसे महत्वपूर्ण घटक पीपल की महत्ता प्रधानमंत्री मोदी ने पेरिस महासम्मेलन के दौरान दुनिया को तो बताई, उसी पीपल की अपने देश में ही उपेक्षा हो रही है।
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प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में कहा था कि जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने में पीपल बहुत अहम है। पीपल प्रकृति का अविभाज्य हिस्सा है और बिना इसके प्रकृति के बारे में सोचा नहीं जा सकता। पीएम के कथन के आइने में अमर उजाला ने शोध-संस्थानों, आप-पास पीपल पर नजर डाली तो पता चला कि इस पर शोध प्रोजेक्ट न के बराबर हैं, पौध नर्सरियों में भी पीपल की उपेक्षा है।

यह हाल तब है, जबकि कें द्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भी राज्यों को पीपल के संरक्षण और विकास के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। केंद्र का पत्र मिलने के बाद प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड ने दो दिन पहले सभी वन संरक्षकों को निर्देश दे दिए हैं कि पीपल का संरक्षण किया जाए। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल में पीपल के संरक्षण से संबंधित मामला आने के बाद केंद्र ने राज्यों को पत्र जारी किया था।
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वनस्पति विशेषज्ञों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन और वातावरण में बढ़ रहे कार्बन डाई आक्साइड उत्सर्जन के खतरों से निपटने में सबसे अधिक सक्षम पेड़ पीपल है। यह चांद की रोशनी में फोटोसिंथेसिस कर कार्बन डाई ऑक्साइड खपाता है और आक्सीजन देता है।

जलवायु परिवर्तन से मंडरा रहे खतरे के इस दौर में जब पीपल की सबसे अधिक जरूरत है तो इसकी उपेक्षा की जा रही है। भारतीय वन अनुसंधान संस्थान में पीपल को विकसित करने के लिए कोई शोध प्रोजेक्ट नहीं है। हालांकि संस्थान के जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञ तीन वरिष्ठ वैज्ञानिक इस वक्त पेरिस महासम्मेलन में शिरकत करने फ्रांस गए हैं।

उपलब्ध डाटा के मुताबिक राष्ट्र स्तर पर पौधरोपण के लिए तैयार की गई नर्सरियों में भी पीपल की पौध सबसे कम है। हाल में भारतीय वन सर्वेक्षण में फॉरेस्ट कवर पर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी है। इसमें भी पीपल पर अधिक ध्यान नहीं दिया गया।

भारतीय वन अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. एनएसके हर्ष ने बताया कि पीपल का पेड़ समुद्र तल से एक हजार फुट की ऊंचाई पर ट्रोपिकल क्षेत्र में भी आसानी से पनप जाता है। धर्मशास्त्रों में भी पीपल का बड़ा महत्व है।

पुराणों में सरस्वती नदी के उद्गम स्थल को पीपल की जड़ों में बताया गया है। श्रीमद्भागवत गीता में भी इसका जिक्र है। पीपल को पेड़ों का राजा बताया गया है। पुराणों में कहा गया कि पीपल के पत्तों पर देवताओं का वास होता है।

एफआरआई के विज्ञानी पेरिस महासम्मेलन में जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर फ्रांस में हो रहे पेरिस महासम्मेलन में भारतीय वन अनुसंधान संस्थान के विज्ञानी भी शिरकत कर रहे हैं। इसमें भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद(आईसीएफआरई) के महानिदेशक डॉ. अश्विनी कुमार, जलवायु परिवर्तन विभाग के डॉ. वीएस रावत और डॉ. टीपी सिंह शामिल हैं।
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