उत्तराखंड राज्य बनाने के लिए शहादत देने वाले शहीदों को सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हमारे नौनिहाल नहीं जानते।
इन बच्चों को यह भी नहीं मालूम की पहाड़ के गांधी कहे जाने वाले इंद्रमणि बड़ोनी कौन हैं? राज्य का गठन कब हुआ? इसे भी उन्हें ठीक से नहीं मालूम। मंगलवार को राजधानी के पांच विभिन्न स्कूलों के बच्चों से किए गए पांच सवालों पर यह हैरान करने वाली स्थिति सामने आई।
राजधानी के पांच विभिन्न सरकारी स्कूलों के बच्चे नहीं बता पाए कि किसकी शहादत से राज्य मिला? मुजफ्फरनगर कांड कब और क्यों हुआ? राज्य आंदोलन में कितने आंदोलनकारियों ने शहादत दी? आंदोलन की शुरूआत कब और कैसे हुई? एक से लेकर आठवीं कक्षा तक के पांच विभिन्न स्कूलों के बच्चों से जब यह सवाल किया गया तो अधिकतर स्कूलों के बच्चे चुप्पी साध गए। यहां यह बताना जरूरी है कि इसमें कसूर इन बच्चों का नहीं है।
दरअसल, स्कूली बच्चों को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी जाती है। सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में चलने वाली किसी भी पुस्तक में राज्य आंदोलनकारियों या राज्य आंदोलन के बारे में एक भी पाठ नहीं है, जिसे पढ़कर बच्चे अपने राज्य के इतिहास और प्रदेश की शख्सियत को जान सकें। शिक्षा विभाग ने राज्य बनने से आज तक ऐसी कोई पाठ्य सामग्री तैयार ही नहीं की है।
स्कूल नंबर एक : प्राथमिक विद्यालय पटेलनगर
पांचवीं क्लास के बच्चों शिवांगी, आंचल, दीपांशी, नीरज कुमारी, दिपांशु कुमार, रश्मि, टीशा ने यह तो बताया कि राज्य गठन दो नवंबर 2000 को हुआ और राज्य गठन से पहले यह उत्तर प्रदेश का हिस्सा था, लेकिन अन्य सवालों का जवाब नहीं दे पाए।
स्कूल नंबर दो : राजकीय बालिका इंटर कॉलेज ब्रहमपुरी
स्कूल के आठवीं क्लास के बच्चे आराधना, गुलीफसा, सिमरन, उष्मा, नगमा और सुहाना भी पांच में से दो से अधिक सवालों का जवाब नहीं दे पाए।
स्कूल नंबर तीन : प्राथमिक विद्यालय निरंजनपुर
पांचवीं कक्षा की सबिता, भारती, अमीता और चमन राज्य गठन का सही जवाब नहीं दे पाए। इन बच्चों ने बताया कि राज्य स्थापना दिवस नौ नवंबर 2001 है।
स्कूल नंबर चार : प्राथमिक विद्यालय माजरा-एक
स्कूल के पांचवीं कक्षा के बच्चों नौशाद, शीतल कुमारी, निशा, अभिषेक, गौरव और अखिलेश पांच में से एक भी सवाल का जवाब नहीं दे पाए। राज्य आंदोलन के बारे में पूछने पर बच्चे कहने लगे कि अंग्रेजों ने यहां राज किया था।
स्कूल नंबर पांच : साधु राम इंटर कॉलेज, कांवली
स्कूल के सातवीं क्लास के बच्चों आदिल, मोहम्मद सोहेल, प्रशांत, अजीत कुमार, साहिल, मोहित, आशु कटारिया और सचिन कुमार भी इंद्रमणि बडोनी को नहीं जानते।