चीन की मुद्रा युआन है। गुंजी में मनी एक्सचेंज बैंक नहीं है। भारतीय कारोबारी जो माल निर्यात करते हैं, उसका चीनी मुद्रा में भुगतान होता है। मनी एक्सचेंज बैंक नहीं होने से भारतीय कारोबारी चीनी मुद्रा में भुगतान नहीं लेकर माल लेने को मजबूर हैं। चीनी कारोबारी इसका फायदा उठाकर दोयम दर्जे का भी माल भारतीयों को थमा देते हैं।
माल रखने को नहीं हैं सरकारी गोदाम
धारचूला से गुंजी तक एक भी सरकारी गोदाम नहीं है। भारतीय कारोबारी अपना माल सड़क किनारे खुले और तंबू में रखने के लिए मजबूर हैं। अति दुर्गम में होने की वजह से भारतीय कारोबारियों को किराये का भी गोदाम नहीं मिल पाता है। आपदा, बारिश में माल नष्ट हो जाता है।
जान, माल दोनों का है खतरा
गुंजी में 1998 में भारतीय स्टेट बैंक की शाखा खुली थी। कारोबारियों के लिए एटीएम की सुविधा नहीं होने की वजह से भारतीय कारोबारी लाखों रुपये नगद ले जाने को मजबूर होते हैं। 52 किमी दुरूह रास्ते में जान माल दोनों का खतरा बना रहता है।
गुंजी में अस्पताल, होटल आदि के भी इंतजाम नहीं है। ऐसे में यदि कारोबारियों के ठहरने, स्वास्थ्य की भी चिंता बनी रहती है। माल लाने के लिए भी घोड़े खच्चर का इंतजाम करना होता है। ऐसे में बेवजह का खर्च होता है।
ट्रांसपोर्ट नहीं होने से बढ़ जाती है लागत
तकलाकोट मंडी से धारचूला तक ट्रांसपोर्ट का इंतजाम नहीं होने से माल की लागत बढ़ जाती है। 70 किलो के एक बोरे पर 2800-3000 रुपये अतिरिक्त चुकाने होते हैं। इससे माल की कीमत बढ़ जाती है।
क्या कहते हैं व्यापारी
सरकार अगर ट्रांसपोर्ट का इंतजाम कर दे तो कारोबारियों को सुविधा होगी। सड़क नहीं होने से भारतीय कारोबारी की जान माल दोनों का खतरा बना रहता है। -शर्मिला रायपा
1998 के बाद एक भी चीनी व्यापारी भारत नहीं आया, हम लोग वहां जाने को मजबूर हैं। भारत सरकार को भी चीन की तरह भारतीय कारोबारियों को बुनियादी सुविधाएं देनी चाहिए। -प्रभात सिंह