सीबीआई टीम ने बाघ, तेंदुओं की मौत के मामले में जांच के सिलसिले में देहरादून वन मुख्यालय से कई बिंदुओं पर जानकारी तलब की थी। इसमें पांच सालों में बाघों की मौत और तेंदुओं का रिकार्ड मांगा गया है। इसके अलावा संदिग्ध/शिकार मामलों की वन विभाग जांच कर रहा है, उसके बारे में भी सीबीआई ने अभिलेख जुटाएं हैं। वन मुख्यालय के अधिकारियों के अनुसार सीबीआई ने कुछ जानकारी एक प्रोफार्मा पर मांगी थी, जिसे उपलब्ध करा दिया गया है।
कई मामलों में वनाधिकारियों की भूमिका सवालों में
नों में वन्यजीवों की मौत के मामलों में वनाधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं। पांच साल पहले तराई केंद्रीय वन प्रभाग के अधीन लामाचौड़ क्षेत्र में आम्रपाली इंस्टीट्यूट के पीछे एक तेंदुआ का शव मिल था। तेंदुआ के गले में तार का फंदा लगा हुआ था। संबंधित मामले में शिकार का मुकदमा दर्ज हुआ था, पर कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
इसी तरह तराई पश्चिमी वन प्रभाग में ज्वाला वन क्षेत्र में बाघ का शिकार हुआ था। बताया जाता है कि उसमें बाघ के शिकारियों को नहीं पकड़ा जा सका। कार्बेट पार्क के कई मामलों को लेकर भी सवाल उठ चुके हैं। पीपुल्स फॉर एनिमल संस्था ने मामले को जोरशोर से उठाया था। इसमें अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए थे।