ले. जनरल आनंद स्वरूप ने कहा कि भारत के लद्दाख और बॉर्डर तक लगातार पहुंच से चीन को दिक्कत हो रही है। अपने आप तो उसने बॉर्डर पार तक सभी सुविधाएं जुटा ली है, लेकिन हमारी ओर से किए जा रहे कार्यों से वह घबरा रहा है। वर्चस्व स्थापित करना चीन की पुरानी नीति है। पाकिस्तान को यकीन दिलाने, डब्ल्यूएचओ का ध्यान भटकाने सहित कई ऐसे मामले हैं, जिसके कारण चीन लगातार इस प्रकार की हरकत कर रहा है। इस मामले में लगातार बातचीत चल रही है। उम्मीद है कि इस दिशा में भारत सख्त कदम उठाएगा।
मेजर जनरल ओपी सब्बरवाल ने कहा कि चीन की यह हरकत नई नहीं है। वह लगातार भारत को उकसाता रहता है। यहीं नहीं अब वह पाकिस्तान और नेपाल को भी भारत के खिलाफ उकसा रहा है। जब से चीन ने तिब्बत पर कब्जा किया है, तब से वह यहां अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहता है। भारत की ओर से जिस प्रकार से बॉर्डर तक सड़क निर्माण और अन्य सुविधाएं विकसित कर रहा है, तब से वह लगातार इस प्रकार की हरकत करता आ रहा है लेकिन भारत के कड़ी प्रतिक्रिया से उसे बार-बार पीछे हटना पड़ा है।
ले. जनरल गंभीर सिंह नेगी ने कहा कि गलवां क्षेत्र में 1962 से लेकर अब तक कोई विवाद नहीं था, लेकिन भारत की ओर से जिस प्रकार एलएसी तक लगातार सड़कों का निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाए जा रहे हैं। उससे चीन बौखला और घबरा गया है। जिससे वह लगातार बॉर्डर इस प्रकार की हरकत कर रहा है। अब मिलिट्री टॉक का समय चला गया है। केंद्र सरकार को इस पर कोई कड़ा कदम उठाना चाहिए। यहां अगर भारत पीछे हटा तो इसका खामियाजा भविष्य में भुगतना पड़ेगा। चीन को भी याद रखना चाहिए कि यह 1962 का भारत नहीं है। अब भारत सक्षम है और चीन को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है।