गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान ने अंतर्राष्ट्रीय सीमा को जोड़ने वाली भैरोघाटी-नेलांग सड़क पर बने नए स्टील गार्डर पुल का उद्धघाटन किया। यह सामरिक और पर्यटन के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है।
बीआरओ (बॉर्डर रोड ऑर्गनाईजेशन) की ओर से भारत-चीन अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित नेलांग घाटी में नवनिर्मित 65 मीटर लंबे डबल लेन स्टील गार्डर पुल कारछा-1 सेतु को देश का समर्पित किया गया। यह पुल भैरों घाटी और नेलांग के बीच जाड़ गंगा की सहायक नदी पर बनाया गया है। जो कि सामरिक और पर्यटन के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है।
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नेलांग घाटी में बॉर्डर रोड ऑर्गनाईजेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान ने अंतर्राष्ट्रीय सीमा को जोड़ने वाली भैरोघाटी-नेलांग सड़क पर बने नए स्टील गार्डर पुल का उद्धघाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में अंतराष्ट्रीय सीमा पर सड़क सहित संचार जैसी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है।
वाहनों की आवाजाही सुचारु
इसके साथ ही वाइब्रेंट विलेज जैसी महत्वकांक्षी योजना से खाली हो चुके गांव अब आबाद होने लगे हैं। वहीं, बीआरओ की ओर से सीमाओं तक अच्छी सड़कें और पक्के पुलों का निर्माण कर सेना की आवाजाही के लिए सुगम मार्ग तैयार कर रही है। बीआरओ के कंमाडर विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि कारछा-1 सेतु का निर्माण कार्य वर्ष 2018 में शुरू किया गया था।
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इस क्षेत्र में 6 माह बर्फ होने के कारण निर्माण कार्यों में परेशानी हुई। लेकिन इन सब मुसीबतों को पार कर बीआरओ ने करीब 6.5 करोड़ की लागत से यह डबल लेन स्टील गार्डर पुल तैयार किया है। पुल उद्धाटन के बाद इस पर वाहनों की आवाजाही सुचारु कर दी है।
वहीं यह सेना सहित वाइब्रेंट विलेज जादूंग और नेलांग की कनेक्टीविटी के लिए भी सुगम मार्ग बन गया है। श्रीवास्तव ने बताया कि सीमा पर आवाजाही को दुरूस्त करने के लिए अन्य पुलों का निर्माण कार्य भी जारी है।