इस साल लद्दाख में चीनी सैनिकों की घुसपैठ की कोशिशों के बाद लिपुलेख में भी सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद की गई है। सभी अग्रिम चौकियों में पिछले वर्षों की तुलना में सेना और अर्द्धसैनिक बलों के अधिक जवान तैनात हैं। लिपुलेख तक सड़क बनने से बीआरओ की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। बीआरओ की सड़क के निर्माण में सीमांत के 500 से अधिक लोग मजदूरी कर रहे हैं। इसको देखते हुए प्रवास पर गए 60 प्रतिशत लोगों ने शीतकाल में भी मूल गांवों में ही रुकने का मन बनाया है।
सात गांवों के 450 परिवार जाते हैं प्रवास पर
धारचूला की व्यास घाटी में स्थित बूंदी, गर्ब्यांग, नपलच्यू, गुंजी, रोंगकांग, नाभी, कुटी गांवों के 450 परिवार हर साल प्रवास पर अपने इन मूल गांवों में जाते हैं। कुटी के धर्मेंद्र कुटियाल ने बताया कि कुटी गांव के 208 परिवार हैं, जिनमें से 50-60 परिवार प्रवास पर जाते हैं। रोंगकांग की प्रधान अंजू रौंकली ने बताया कि व्यास घाटी में अब सड़क पहुंच गई है। इस साल कैलाश यात्रा और भारत-चीन व्यापार न होने से मानसून काल में कारोबार ठप रहा। ऐसे में कई ग्रामीणों ने शीतकाल में भी वहीं रुकने का मन बनाया है।
उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में शीतकाल में रहना आसान नहीं था। इस साल लिपुलेख तक सड़क पहुंच गई है। गांवों तक जाना आसान हो गया है। सुरक्षा बलों के वहां पर तैनात होने और बीआरओ का सड़क का काम जारी होने से शीतकाल में भी ग्रामीणों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
- मंगल सिंह बुदियाल, ग्राम प्रधान बूंदी।