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निर्दलीय प्रत्याशी बिगाड़ सकते हैं बड़े दलों का गणित

Mon, 24 Mar 2014 01:17 PM IST
सुधाकर भट्ट/अमर उजाला, देहरादून
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चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशी भले कम संख्या में सफले होते हों पर ये बड़े दलों का समीकरण जरूर बिगाड़ देते हैं।
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लोक सभा चुनाव 2014 में उत्तराखंड से इस बार भी निर्दलीयों की भरमार रहेगी। 2009 में चुनाव मैदान में उतरे कुल 76 प्रत्याशियों में से 29 तो निर्दलीय ही थे।

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निर्दलीयों के मामले में टिहरी और हरिद्वार की सीट अधिक उर्वर साबित हो रही है। ऐसे में इन दोनों सीटों पर निर्दलीय प्रमुख राजनीतिक दलों का समीकरण प्रभावित कर सकते हैं।
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बदल चुके हैं राज्य में समीकरण

2009 के लोक सभा चुनाव में उत्तराखंड से कांग्रेस ने पांचों सीटों पर जीत हासिल की थी। गढ़वाल सीट से सांसद बने सतपाल महाराज अब भाजपा के साथ हैं। दूसरी ओर टिहरी और हरिद्वार के लिए कांग्रेस प्रत्याशियों को ही नहीं खोज पा रही है।

टिहरी और हरिद्वार में इस बार ‘आप’ की उपस्थिति भी है। दूसरी ओर भाजपा ने हरिद्वार में पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और गढ़वाल में पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी पर दांव खेला है।

दोनों तरफ असंतुष्ट
कांग्रेस में असंतुष्ट तो हैं हीं पर भाजपा में भी कइयों के मन में नाराजगी के भाव है। ऐसे में पहले से ही निर्दलीयों के लिए उर्वर बनी हरिद्वार और टिहरी की संसदीय सीट इस बार भी अपवाद न साबित होने का संकेत दे रही है।

निर्दलीयों की खासी संख्या राष्ट्रीय दलों के समीकरण को प्रभावित जरूर कर सकती है। 2009 के चुनाव में ही निर्दलीय करीब 14 प्रतिशत वोट ले गए थे। इसमें पोस्टल बैलेट भी शामिल हैं।

राष्ट्रीय दलों के ल‌िए खतरे की घंटी

दोनों राष्ट्रीय दलों के लिए खतरे की घंटी इसलिए भी है कि कांग्रेस और भाजपा के बीच किसी भी सीट पर हार-जीत का अंतर पांच प्रतिशत से अधिक नहीं रहा है।

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दूसरी ओर निर्दलीय करीब ढाई प्रतिशत वोट तो ले ही जा रहे हैं। ऐसे में जिस दल को निर्दलीय ज्यादा नुकसान पहुंचाएंगे, उस दल का प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने का खतरा भी रहेगा।

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निर्दलीयों ने पिछले चुनाव में दोनों राष्ट्रीय दलों के बागी मैदान में नहीं थे। इस बार भी समीकरण कुछ इसी तरह के नजर आ रहे हैं। पर गढ़वाल सीट पर महाराज और नैनीताल सीट पर एनडी तिवारी की सक्रियता कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है।

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इसी तरह भाजपा में भी अंदरखाने नाराज चल रहे नेताओं का रुख पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाला साबित हो सकता है।
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2009 में पांचो सीटों पर निर्दलीयों का प्रदर्शन

टिहरी
राष्ट्रीय पार्टियां-चार
राज्य पार्टियां-1
राज्य पार्टियां-अन्य राज्य-1
पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त दल-2
निदर्लीय-8
कुल-16
निर्दलीयों का मत प्रतिशत-3.65

गढ़वाल
राष्ट्रीय पार्टियां-4
राज्य पार्टियां-1
राज्य पार्टियां-अन्य राज्य-1
पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त दल-4
निदर्लीय-3
कुल-13
निर्दलीयों का मत प्रतिशत-2.66

अल्मोड़ा
राष्ट्रीय पार्टियां-3
राज्य पार्टियां-1
राज्य पार्टियां-अन्य राज्य-1
पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त दल-1
निदर्लीय-1
कुल-7
निर्दलीयों का मत प्रतिशत-3.18

नैनीताल
राष्ट्रीय पार्टियां-3
राज्य पार्टियां-2
राज्य पार्टियां-अन्य राज्य-2
पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त दल-3
निदर्लीय-3
कुल-13
निर्दलीयों का मत प्रतिशत-1.96

हरिद्वार
राष्ट्रीय पार्टियां-3
राज्य पार्टियां-2
राज्य पार्टियां-अन्य राज्य-0
पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त दल-4
निदर्लीय-11
कुल-20
निर्दलीयों का मत प्रतिशत-2.63
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