इनामुल हक करीब छह साल पहले उत्तराखंड के पंतनगर में धार्मिक उन्माद फैलाकर अपनी मां, भाई और एक परिचित को भी सलाखों के पीछे पहुंचा चुका है। आरोपी की करतूत से पंतनगर में धार्मिक उन्माद की आग भड़की थी। इसी मामले में वह छह महीने हल्द्वानी जेल में रहा था। आरोपी को उसका परिवार बेदखल कर चुका है। इनामुल के पिता बरेली के कटघर किला निवासी नूरूल हक वर्ष 1977 में जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय के कम्युनिकेशन सेंटर में बतौर लैब टेक्नीशियन तैनात हुए थे।
नम्र और सहयोगी स्वभाव के नूरूल के बड़े बेटे फरीदुल हक और छोटे बेटे इनामुल की शिक्षा परिसर के ही स्कूलों में हुई थी। नूरूल हक के इंतकाल के बाद मृतक आश्रित कोटे के तहत विवि में कनिष्ठ लिपिक पद पर बड़े बेटे फरीदुल को नियुक्ति दी गई थी। फरीदुल मां और छोटे भाई के साथ झा कॉलोनी में रह रहा था।
इसी बीच 11 सितंबर 2014 को इनामुल हक ने झा कॉलोनी स्थित एक धार्मिक स्थल में तोड़फोड़ कर दी। परिजनों ने उसे मानसिक रूप से अस्वस्थ करार दिया था। इसके बाद भड़के दंगे में परिसर के एक समुदाय विशेष की तीन दुकानें आग के हवाले कर दी गईं। इसके बाद परिसर को छावनी में तब्दील कर कर्फ्यू लगा दिया गया था। पुलिस ने इनामुल सहित फरीदुल, उनकी मां और एक परिचित भूरा कबाड़ी को जेल भेजकर मकान सील कर दिया था। तब इनामुल छह माह तक हल्द्वानी जेल में बंद रहा। जेल में उसकी गतिविधियां सामान्य थीं।
इस घटना के बाद विवि प्रशासन ने फरीदुल को नौकरी से निलंबित कर दिया था। करीब पांच माह बाद जेल से छूटे मां और भाई ने इनामुल को बेदखल कर दिया और सात महीने बाद फरीदुल की नौकरी में बहाली हुई थी। इनामुल जेल से कब छूटा और कहां गया, इसकी जानकारी परिवार को नहीं है। उधर, लखनऊ में एटीएस के एडीजी डीके ठाकुर ने बताया कि आरोपी को रिमांड पर लिया है। पुलिस की टीमें शीघ्र ही उसके नेटवर्क को खंगाल लेगी।
इनामुल हक के भाई फरीदुल हक को अफसोस है कि जिहाद का आरोपी इनामुल उनके परिवार में पैदा हुआ। उसकी करतूत से परिवार बेहद दुखी है। इनामुल हक की करतूत के बारे में जब फरीदुल से बातचीत की गई तो उन्होंने इस बारे में अधिक बात करने से अनिच्छा जताते हुए कहा कि वह पहले से ही इनामुल की हरकतों से बहुत तकलीफ झेल चुके हैं। उनके वर्तमान के बारे में उनको ज्यादा कुछ नहीं पता। जेल से लौटने पर हम लोगों ने उसे बेदखल कर दिया था। इसके बाद हमें उसकी कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि अच्छा होता इनामुल उनके परिवार में पैदा नहीं हुआ होता।
समाज से दूरी बनाकर रहता था इनामुल
दंगे से पहले तक पंतनगर में रहा इनामुल शुरू से ही समाज से कटकर रहता था। यही कारण है कि उसका पंतनगर में कोई दोस्त नहीं है। पड़ोसियों ने बताया कि दंगे के बाद वह कभी दिखाई नहीं दिया। जब वह यहां रहा, तब वह न तो किसी से बात करता था और न ही उसकी किसी से दुआ सलाम थी। इसलिए लोग उसे मानसिक रूप से अस्वस्थ समझते थे। उसके भाई फरीदुल ने बताया कि वह शुरू से ही एकांत प्रिय रहा। यहां तक कि हम लोगों से भी जरूरत भर की ही बात करता था। वह अधिकतर अपना समय धार्मिक साहित्य पढ़कर या टीवी पर धार्मिक सीरियल देखकर व्यतीत करता था।