उत्तराखंड में गुरुवार से विभिन्न सरकारी विभागों के करीब दो लाख कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
इस दौरान दफ्तरों में कामकाज नहीं होगा। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर प्रहलाद सिंह का दावा है कि हड़ताल में आपातकालीन सेवाओं को शामिल नहीं किया जाएगा। लेकिन दूसरी सेवाएं ठप रहेंगी।
21 अक्तूबर से आपातकालीन सेवाएं भी ठप
उन्होंने सरकार को चेताया कि यदि तीन दिन में उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो 21 अक्तूबर से आपातकालीन सेवाएं भी ठप कर दी जाएंगी। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की हाई पावर कोर कमेटी की बुधवार को विकास भवन में हुई बैठक में अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया गया।
यह भी तय किया गया कि कर्मचारी कोई कामकाज नहीं करेंगे लेकिन उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा। सरकारी संपत्ति या दूसरी तरह की तोड़फोड़ जैसी गतिविधियां नहीं होंगी।
कर्मचारियों ने शासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ मुख्य सचिव मांगों पर निर्धारित समय के भीतर कार्रवाई के निर्देश कर रहे हैं, वही शासन में बैठे अधिकारी मुख्य सचिव के आदेशों की अनदेखी कर मांगों को टालने में लगे हैं। इस वजह से मजबूर होकर कर्मचारियों को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाना पड़ रहा है।
शासनादेश जारी नहीं हुआ
परिषद के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर प्रहलाद सिंह ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों पर सहमति बनने के बावजूद शासनादेश जारी नहीं हुआ।
इससे प्रदेश भर के कर्मचारियों में नाराजगी है। कहा कि प्रदेश में कर्मचारियों के साथ अन्याय हो रहा है।
स्थिति यह है कि 25 से 30 साल तक कर्मचारी एक ही पद पर हैं। जबकि अधिकारी पूरे सेवाकाल में आठ से दस प्रमोशन ले रहे हैं। बैठक में निर्णय लिया गया कि परिषद से जुड़े कर्मचारी राजधानी में परेड ग्राउंड एवं जनपदों में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेंगे।
बैठक में प्रांतीय प्रवक्ता अरुण पांडे, बीडी जोशी, आरएस बिष्ट, मंजू बडोला, पान सिंह राणा, ओमवीर सिंह, भोपाल सिंह, नंद किशोर त्रिपाठी, डीएस असवाल, संजय अग्रवाल आदि मौजूद थे।
भारी पड़ेगी हड़ताल
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद से जुड़े कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आम आदमी पर भारी पड़ने वाली है। कर्मचारियों की गैरमौजूदगी से कई जरूरी काम नहीं हो पाएंगे। इस दौरान दफ्तरों में काम कराने आने वाले लोगों को दिक्कतों को सामना करना पड़ेगा।
विभिन्न सरकारी विभागों के अलावा एडीओ और वीडीओ भी हड़ताल में शामिल हैं। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद इन्हें ग्राम पंचायतों का प्रशासक बनाया गया है।
नहीं हो पाएगा जीर्णोद्धार का काम
इनके हड़ताल पर रहने से ग्राम स्तर से बनने वाले जाति, हैसियत आदि प्रमाणपत्र नहीं बन पाएंगे। तहसीलों में खसरा खतौनी नहीं मिल पाएगी। उद्यान विभाग के कर्मचारियों के हड़ताल से जुड़े होने से पुराने बगीचों के जीर्णोद्धार का काम नहीं हो पाएगा, जो समयबद्ध कार्यक्रम है।
जीर्णोद्धार न हुआ तो किसानों को आम-लीची के बागों से सीजन में भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। हड़ताल की सबसे अधिक मार किसानों पर पड़ने जा रही है। 19 अक्तूबर से कृषक महोत्सव शुरू नहीं होने से किसानों को खाद, बीज और कृषि यंत्र नहीं मिल पाएंगे।
जबकि ओबीसी सर्वे का काम ठप हो जाएगा। हड़ताल लंबी खिंची तो स्वास्थ्य एवं अन्य सुविधाएं भी चरमरा जाएंगी।
फेसबुक पर राय देने के लिए क्लिक करें...