| प्रदेश |
बेरोजगारी दर |
| केरल |
47 |
| जम्मू कश्मीर |
46.3 |
| छत्तीसगढ़ |
40.0 |
| उत्तराखंड |
36.6 |
| राजस्थान |
35.2 |
| झारखंड |
34.2 |
| मध्यप्रदेश |
31.4 |
| असम |
31.3 |
| उड़ीसा |
30.3 |
| तमिलनाडु |
28.5 |
| तेलंगाना |
27.4 |
| हिमाचल |
26.6 |
| महाराष्ट्र |
26.2 |
| हरियाणा |
25.8 |
| बिहार |
25.8 |
| उत्तरप्रदेश |
24.7 |
| आंध्रप्रदेश |
22.6 |
| पंजाब |
20.3 |
| पश्चिम बंगाल |
19.4 |
| कर्नाटक |
17.2 |
| दिल्ली |
16.7 |
| गुजरात |
11.6 |
(स्रोत : एनएएसओ की रिपोर्ट)
बेरोजगारी के कारण उत्तराखंड में भी आत्महत्याओं के मामले दर्ज हुए हैं। यह तथ्य लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में सामने आया। जानकारी दी गई कि वर्ष 2016 से 2020 के मध्य देश में 3548 लोगों ने बेरोजगारी के कारण आत्महत्याएं कीं। उत्तराखंड में ऐसे 29 मामले दर्ज हुए। उत्तराखंड की तुलना में पड़ोसी राज्य हिमाचल में बेरोजगारी के कारण आत्महत्या के बहुत अधिक मामले दर्ज हुए हैं। पांच सालों में वहां 230 लोगों की आत्महत्या की वजह बेरोजगारी थी।
बेरोजगारी के कारण आत्महत्या के मामले
| राज्य |
2016 |
2017 |
2018 |
2019 |
2020 |
| उत्तराखंड |
04 |
01 |
07 |
0 |
17 |
| हिमाचल |
12 |
40 |
94 |
64 |
20 |
(स्रोत : लोकसभा में प्रश्न का उत्तर)
चुनाव से पहले सरकार भी थी दबाव में
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा था। इस मुद्दे की प्रदेश सरकार को पहले से ही आहट हो चुकी थी। दबाव ही था कि ऐन चुनाव से पहले सरकार को सरकारी विभागों में खाली हजारों पदों को भरने की प्रक्रिया को आनन फानन में शुरू करना पड़ा। कुछ पदों पर भर्ती की प्रक्रिया ने जोर भी पकड़ा। चुनाव में सभी विरोधी दलों ने बेरोजगारी को प्रचार का मुख्य हथियार बनाया।