कोठगी गांव के पंचायत भवन या किसी के चौक में ये तीनों गांव की 10-15 महिलाओं व अन्य बच्चों को प्राणायाम, कपाल भांति, अनुलोम-विलोम, सूर्य नमस्कार आदि योग का अभ्यास कराती हैं। साथ ही दंड बैठक भी करती हैं।
घर के कामकाज से लेकर खेतीबाड़ी और पशुपालन के साथ वृद्ध महिलाएं योग के लिए समर्पित हो चुकी हैं। नियमित योग कक्षा संचालन के साथ सामाजिक कार्यों के दौरान भी वे लोगों को योग के बारे में बताती हैं। इसके अलावा, समय-समय पर स्कूलों में भी छात्र-छात्राओं व अभिभावकों को योग के महत्व से अवगत करा रही हैं।
सरोजनी पंवार ने बताया कि वे पहले घुटनों के दर्द, कमर दर्द, जोड़ों के दर्द, हाथ-पैरों की जलन से परेशान रहती थी। लेकिन बीते 8 वर्ष से योगाभ्यास से सभी रोग दूर हो गए हैं।
यही बात अन्य दो महिलाओं ने भी बताई कि पहले जोड़ों के दर्द से परेशान रहती थी। लेकिन अब, पूर्णतया स्वस्थ्य हैं। उम्र के इस पड़ाव में भी वे फूर्ति के साथ घरों में दैनिक जीवन के कार्यों को कर रही हैं।
बच्चों की पढ़ाई व विवाह की ज्यादातर जिम्मेदारियां पूरी कर ली हैं। अब, लोगों को योग का महत्व बताते हुए उन्हें स्वस्थ्य शरीर के लिए प्रेरित करना प्राथमिकता है।
पतंजलि योग समिति के सह राज्य प्रभारी संयोजक लक्ष्मी शाह ने बताया कि कोठगी गांव की तीनों वृद्ध महिलाओं ने गांव में योग के प्रति लोगों में जो विश्वास जगाया है। उसके परिणाम मिलने लगे हैं। उनकी योग कक्षाओं में नियमित रूप महिलाएं व ग्रामीण प्रतिभाग कर रहे हैं।