बदरीनाथ हाईवे पर हाथी पर्वत की तलहटी पर हो रहे भूस्खलन से जहां बदरीनाथ हाईवे बाधित हुआ है वहीं, मलबे से अलकनंदा का रुख भी बदल रहा है। इस जोन पर वाहनों की आवाजाही भी खतरे से खाली नहीं है।
शुक्रवार को अपराह्न साढ़े तीन बजे यहां भूस्खलन शुरू हुआ और करीब तीन बार चट्टान से बोल्डर ओर मलबा हाईवे पर आ गए। इससे हाईवे के दोनों ओर फंसे वाहनों में बैठे तीर्थयात्रियों में दहशत है।
हाथी पर्वत पर वर्ष 2015 से भूस्खलन शुरू हुआ, जो अब डेंजर जोन बन चुका है। हालांकि इन दो सालों में बीआरओ की ओर से हाईवे को सुचारु करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
हाथी पर्वत के पास बोल्डरों को विस्फोट से तोड़कर मलबे के ऊपर से ही करीब तीन सौ मीटर हाईवे का निर्माण किया गया है, लेकिन चट्टान के साइड ट्रीटमेंट कार्य न होने से यहां खतरा बना है। चट्टान पर अभी भी नुकीले पत्थर और बोल्डर अटके हुए हैं। बरसात में अभी तक लामबगड़ भूस्खलन जोन पर ही हाईवे के बाधित होने का डर बना हुआ था।
लेकिन अब हाथी पर्वत भी बरसात में परेशानी का सबब बना रहेगा। बीआरओ के कमांडर आर सुब्रमण्यम का कहना है कि हाथी पर्वत के पास आए बोल्डरों को विस्फोट से तोड़ा जाएगा। यहां पर हाईवे को काफी चौड़ा कर दिया गया था। अब दोबारा बोल्डर और मलबा आ गया है, जिसे हटाने का काम भी शुरू कर दिया गया है।