दिलचस्प बात यह है कि दोनों ने अलग-अलग शहरों में रहते हुए भी एक ही सपना साझा किया, भारतीय सेना की वर्दी पहनने का। उन्होंने न केवल एक-दूसरे का हौसला बढ़ाया, बल्कि तैयारी के हर चरण में एक-दूसरे का सहारा बने।
आयुष कहते हैं कि उनकी सफलता में रोहिनी का योगदान अहम रहा और इसी आपसी सहयोग का परिणाम है कि आज दोनों भारतीय सेना का हिस्सा हैं। आयुष ने पहले ही प्रयास में एसीसी परीक्षा उत्तीर्ण की है। आयुष की शुरुआती शिक्षा केवि कैंट मथुरा से हुई है।