भारतीय सेना अकादमी (आईएमए) से 1964 में पासआउट बैच के सामने सबसे पहली और बड़ी चुनौती अगले ही वर्ष पाकिस्तान से हुए युद्ध में मिली। उस वक्त इन युवा अधिकारियों ने हर मोर्चे में दुश्मन को करारी शिकस्त दी।
इस बैच के जनरल जेजे सिंह (रिटायर्ड) थलसेना प्रमुख बने थे। 50 साल बाद अकादमी में पुनर्मिलन कार्यक्रम में पत्नियों संग पहुंचे इन 110 सेवानिवृत्त अधिकारियों में पुरानी यादों ने वह जोश दोबारा भर दिया।
भारतीय सैन्य अकादमी में 18 से 19 दिसंबर तक हुए स्वर्ण जयंती समारोह में पहुंचे अधिकारी मानते हैं कि चीन से युद्ध के बाद सेना को लेकर न सिर्फ युवाओं का नजरिया बदला, बल्कि जज्बा और मजबूत हुआ।
1962 में चीन के खिलाफ हुए युद्ध ने भारतीय सेना में प्रशिक्षण की तस्वीर बदली। इस युद्ध के बाद डेढ़ वर्ष तक अकादमी ने बड़ी संख्या में कैडेट्स प्रशिक्षित किये। उस दौर में अकादमी में इमरजेंसी बैच शुरू हुए।