आन, बान और शान की प्रतीक भारतीय सैन्य अकादमी 80 वर्ष की हो गई। मंगलवार को अकादमी में 81वां स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया। इस मौके पर अकादमी की 80 साल की गौरवगाथा को याद करते हुए विभिन्न कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।
इंडियन मिलिट्री एकेडमी की स्थापना एक अक्तूबर 1932 को हुई थी। अकादमी में उस वक्त केवल 40 कैडेट ही प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते थे। वक्त बीतने के साथ ही आईएमए की अहमियत बढ़ती गई। सेना में अफसरों की कमी को पूरा करने के लिए लगातार आईएमए की क्षमता में भी बदलाव किया गया। इस वक्त आईएमए की क्षमता 1800 कैडेट की हो गई है।
अकादमी से इस लंबे अंतराल में 30 मित्र राष्ट्रों के कैडेटों सहित कुल 53,571 जेंटलमैन कैडेट पास आउट होकर देश की सेना का हिस्सा बने। इन्होंने सेना में अपनी जांबाजी के दम पर अलग पहचान भी कायम की।
विश्वस्तरीय पहचान
आईएमए कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल मानवेंद्र सिंह ने कहा कि अकादमी के कैडेटों ने अपनी जांबाजी के दम पर इसे विश्वस्तरीय पहचान दी है। आईएमए कैडेट के दम पर ही आज राष्ट्र की सेनाओं में हजारों की संख्या में जांबाज ऑफिसर देश की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
झंडा ऊंचा रखने की प्रतिबद्धता
बताया कि स्थापना दिवस समारोह के तहत आईएमए में 29 सितंबर से कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। स्थापना दिवस के मौके पर आईएमए के सभी स्टाफ, जेंटलमैन कैडेट्स, सर्विस और सिविलियन कर्मचारियों ने एक बार फिर इसी मेहनत व जतन के साथ आईएमए का झंडा ऊंचा रखने की प्रतिबद्धता जताई। इस मौके पर उत्तराखंड के राज्यपाल डा. अजीज कुरैशी भी मौजूद रहे।