मुजफ्फरनगर के सिसौना, रामपुर, मेदपुर और बागोवाली गांव में बनाए गए मिलन केंद्र उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बेहतर रिश्तों की नई इबारत लिखने जा रहे हैं। इन मिलन केंद्रों का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है।
उत्तराखंड आंदोलन के दौरान 2 अक्तूबर 1994 को रामपुर तिराहे पर राज्य आंदोलनकारियों को पुलिसिया बर्बरता से इन्हीं गांवों के लोगों ने बचाया था और अपने घरों पर शरण दी थी।
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मुख्यमंत्री ने की थी मिलन केंद्रों की घोषणा
पिछले साल शहीद आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि देने रामपुर तिराहा पहुंचे मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने इन मिलन केंद्रों की घोषणा की थी। बाद में केंद्रों के लिए 10-10 लाख रुपये सरकार की ओर से भेजा गया।
बुधवार को शहीद आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि देने मुख्यमंत्री मुजफ्फरनगर पहुंच रहे हैं। सुबह करीब 9.30 बजे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य के साथ हुए रामपुर तिराहा पहुंचेंगे।
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देवदूत बन कर उतरे थे ग्रामीण
बताया जाता है कि मुजफ्फरनगर के सिसौना, रामपुर, मेदपुर और बागोवाली गांव के लोग 2 अक्तूबर 1994 की उस रात राज्य आंदोलनकारियों के लिए देवदूत बन कर उतरे थे।
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दिल्ली जाते हुए हजारों आंदोलनकारियों पर उस रात पुलिस गोलियां और लाठियां बरसा रही थी। ग्रामीणों ने आंदोलनकारियों को पुलिस से बचा कर अपने घरों में शरण दी।
ये मिलन केंद्र दोनों राज्यों के लोगों के बीच बेहतर रिश्ते और स्थानीय ग्रामीणों की मदद की यादें बनाए रखने का काम करेंगे। मिलन केंद्रों के निर्माण का कार्य पूरा होने की जानकारी पिछले दिनों महावीर शर्मा के नेतृत्व में मुजफ्फरनगर से आए कुछ ग्रामीणों ने ही मुख्यमंत्री को दी।
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