मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अधिकारियों को नशा कारोबार पर सख्ती से शिकंजा कसने के आदेश दिए हैं, लेकिन नशा तस्करों का तंत्र प्रशासन पर भारी पड़ रहा है।
तस्कर उत्तराखंड से अफीम ले जाकर यूपी के सरहदी इलाकों में हेरोइन बनवाते हैं और फिर यहीं लाकर बेचते हैं, लेकिन अभी तक उन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने कार्रवाई के बाद शासन-प्रशासन को भी इस संबंध में अवगत कराया है। डेढ़ साल पहले नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने रामपुर में अफीम से हेरोइन बनाने वाली फैक्ट्री पकड़ी थी। ब्यूरो ने रिपोर्ट दी थी कि उत्तराखंड से अफीम ले जाकर यूपी के सरहदी गांवों में हेरोइन बनाई जाती है।
एक महीने पहले मसूरी में पकड़े गए चार अफीम तस्करों ने बताया था कि वे अफीम सहारनपुर की मंडी में बेचते हैं। इन तस्करों के पकड़े जाने के चार दिन बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की टीम ने मसूरी तहसील क्षेत्र के गांवों में छापा मारा था, वहां अफीम की फसल नष्ट मिली थी।
नायब तहसीलदार मसूरी ने डीएम को जो रिपोर्ट भेजी थी उसमें अफीम के खेतों की वीडियो क्लिप के साथ कुछ राजनीतिक पहुंच वालों के नाम भी थे। राजनीतिक हलकों में प्रभावी लोगों के नाम होने पर रिपोर्ट दबा ली गई थी।
इसी तरह नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने पिथौरागढ़ में दून के दो छात्रों को पकड़ा था। ये नशीले पदार्थों के तस्करों के गिरोह से जुड़े थे। ब्यूरो इस मामले की छानबीन कर रहा है। इस संबंध में ब्यूरो ने अपने दिल्ली स्थित आफिस भी रिपोर्ट भेजी है। डीएम रविनाथ रमन के मुताबिक उन रूटों की जानकारी है, जहां से नशीले पदार्थ आते हैं, इन पर अंकुश लगाया जाएगा।