खनन को लेकर गौतमबुद्धनगर की एसडीएम दुर्गा शक्ति इन दिनों चर्चा में हैं। आरोप है कि खनन माफिया के दबाव में यूपी शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया है। दरअसल, नदियों में खनन कुबेर का वह खजाना है जिसे पाने के लिए माफिया किसी भी हद तक जा सकता है। जगह चाहे जहां की हो माफिया का व्यवहार एक जैसा ही होता है।
प्रशासनिक अधिकारी यदि सख्ती दिखाता है तो उसे सबक सिखा दिया जाता है। दून की आठ नदियों में भी इन दिनों बारिश और जलस्तर बढ़ने के बावजूद अवैध खनन धड़ल्ले से हो रहा है। हर रोज महज पांच घंटे में सौ से 150 ट्रक खनन सामग्री नदियों से निकाली जा रही है। लेकिन बावजूद प्रशासनिक अमला मूक दर्शक बना हुआ है।
अमर उजाला टीम ने मंगलवार सुबह राजधानी की विभिन्न नदियों में हो रहे अवैध खनन का जायजा लिया। पता चला कि सुबह पांच बजे से खनन माफिया के वाहन नदियों में पहुंच जाते हैं। सुबह नौ या दस बजे तक यह सिलसिला जारी रहता है। इस दौरान कहीं भी पुलिस या वन विभाग का कोई कर्मचारी नजर नहीं आया, जबकि ये वाहन कई चौकियों को पार करते हुए निकलते हैं। सूत्र बताते हैं कि दिखावे के लिए पुलिस और वन विभाग महीने में एकाध ट्राली पकड़ खानापूर्ति कर देते हैं।
इन नदियों में हो रहा खनन
शीतला नदी में प्रेमनगर
टौंस नदी में मसंदावाला और बाजावाला
सुसवा नदी में मोथरोवाला, नोका, बड़कली, चिसुपानी, दूधली, बुल्लावाला
सौंग नदी में रायपुर, मियांवाला, बालावाला, लच्छीवाला, डोईवाला और राजाजी पार्क के किनारे के क्षेत्र
नून नदी में जामुनवाला, घंघोड़ा, धौलास
इनके अलावा जाखन, बिंदाल और रिस्पना में खनन जारी है।
क्या है रेट लिस्ट
ट्रैक्टर ट्राली प्रति चक्कर 400 रुपये
ट्रक प्रति चक्कर 1200 रुपये
(अवैध खनन में लगे वाहन चालकों ने यह रकम पुलिस चौकी में देने की बात कही)
ग्रामीणों ने पकड़ी ट्रैक्टर ट्राली
अवैध खनन करने वालों से नदियों के किनारे बसे गांवों के लोग परेशान हैं। मंगलवार को बाजावाला के ग्रामीणाें ने दो ट्रैक्टर ट्रालियों को पकड़ लिया। बाद में खनन से भरे दोनों वाहन कैंट पुलिस को सौंप दिए गए। मसंदावाला निवासी विजय कुमार ने कहा कि सरकारी मशीनरी अवैध खनन को रोकने में नाकाम है। कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में खनन नहीं होने देंगे।
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