जुर्माना माफ के पक्ष में नहीं वित्त विभाग
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, बेशक अभी इस मसले पर निर्णय होना है, लेकिन एक पक्ष 315 करोड़ की जुर्माने की राशि माफ करने का भी विकल्प सुझा रहा है। इस पक्ष का कहना है कि रायल्टी के रूप में सरकारी खजाने में 63 करोड़ रुपये की धनराशि जमा हो गई है। सरकार को कोई नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन वित्त विभाग इसके पक्ष में नहीं हैं। कैबिनेट की बैठक में वित्त विभाग की ओर से यही बात रखी गई है कि जुर्माना माफ करने का कोई औचित्य नहीं बनता।
प्रदेश मंत्रिमंडल के समक्ष यह प्रस्ताव रखा गया कि कैग ने जो सवाल उठाया है, उसके तहत 315 करोड़ जुर्माना वसूली पर क्या निर्णय लिया जाना चाहिए। कैबिनेट ने मंत्रिमंडलीय उपसमिति बनाने का फैसला किया है। अब उपसमिति ही रास्ता सुझाएगी। - डॉ. पंकज पांडेय, सचिव, खनन
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प्रदेश सरकार के लिए 315 करोड़ रुपये बहुत बड़ी धनराशि है। इसलिए इस पर सोच-विचार हो रहा है। अब मंत्रिमंडलीय उपसमिति के पास यह मामला है। उपसमिति की रिपोर्ट आने के बाद आगे की दिशा तय हो पाएगी। - दिलीप जावलकर, सचिव वित्त