केदारधाम में तबाही को छह महीने से ज्यादा गुजर चुके हैं, लेकिन अभी तक यह पता नहीं चल सका कि केदारनाथ मंदिर की नींव और ढांचे की मजबूती का हाल क्या है।
भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण (जीएसआई) की रिपोर्ट भी यह साफ नहीं कर सकी। अब बारी आईआईटी चेन्नई की है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई ने हकीकत जानने के लिए आईआईटी से मदद मांगी है।
संरक्षण के लिए आकलन जरूरी
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के विशेषज्ञों की मानें तो केदारनाथ मंदिर में संरक्षण कार्य को अंजाम देने के लिए मंदिर की नींव और ढांचे से जुड़ी यह जानकारी बेहद जरूरी है।
एएसआई के महानिदेशक (डीजी) कार्यालय से केदारनाथ मंदिर का अध्ययन कराए जाने के संबंध में एक प्रस्ताव बनाकर आईआईटी चेन्नई को भेजा गया है।
30 लाख का खर्च
आईआईटी चेन्नई के विशेषज्ञों के अध्ययन पर कुल 30 लाख रुपये का खर्च आएगा। वह स्ट्रक्चर स्टेबिलिटी के साथ ही फाउंडेशन स्टेबिलिटी का भी अध्ययन करेंगे। इसके बाद एएसआई को सुझाएंगे कि क्या किया जाए, जिससे केदारधाम अक्षुण्ण रहे।
आईआईटी चेन्नई ही क्यूं
उत्तराखंड में आईआईटी रुड़की के होने के बावजूद आईआईटी चेन्नई को ही प्रस्ताव इसलिए दिया गया है, क्योंकि वहां हेरिटेज बिल्डिंग स्ट्रक्चर, डिजाइनिंग से जुड़ा विभाग है। यह पहले भी कई हेरिटेज इमारतों के लिए कार्य कर चुका है।