इगास पर्व पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने के संबंध में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फर्जी शासनादेशों को लेकर शासन ने कड़ा नोटिस लिया है। अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन राधा रतूड़ी ने प्रकरण की जांच करने और एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
देर रात साइबर थाने में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शुक्रवार को इगास पर सार्वजनिक अवकाश नहीं है। इससे पूर्व उत्तराखंड सचिवालय संघ ने अपर मुख्य सचिव, सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर सोशल मीडिया पर वायरल शासनादेश की जांच कराने के संबंध में पत्र लिखा था। इस पत्र के बाद अपर मुख्य सचिव ने आदेश जारी किए।
बता दें कि उत्तराखंड सचिवालय संघ, पर्वतीय शिक्षक कर्मचारी संगठन समेत राजनेताओं और सामाजिक संगठनों ने प्रदेश सरकार से अनुरोध किया था कि बृहस्पतिवार को इगास पर्व पर सार्वजनिक अवकाश घोषित होना चाहिए। इस संबंध में उनकी ओर से मुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव को मांग पत्र भी दिए गए। प्रदेश सरकार के विभागीय व जिला कार्यालयों से लेकर राज्य सचिवालय में तैनात कर्मचारियों में ये जानने की उत्सुकता रही कि सरकार ने इगास पर्व पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है कि नहीं।
इस दौरान सोशल मीडिया पर दो फर्जी शासनादेश भी वायरल हो गए। ये दोनों शासनादेश अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन राधा रतूड़ी के हस्ताक्षरों से जारी दर्शाए गए। इसके बाद सचिवालय संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी और महासचिव राकेश जोशी ने एसीएस, सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर फर्जी शासनादेशों की जांच कराने की मांग की।
उन्होंने लिखा कि फर्जी आदेश बनाए जाने से शासन की छवि धूमिल हो रही है। इस पर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने खंडन जारी किया और सोशल मीडिया पर वायरल शासनादेशों को फर्जी बताया। स्पष्ट किया कि इगास पर्व पर कोई अवकाश घोषित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि मामले एफआईआर दर्ज कराई जा रही है।
उधर देर रात एसटीएफ की डीआईजी रिद्धिम अग्रवाल ने साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज होने की पुष्टि की हैै। सचिवालय के अनुभाग अधिकारी रमेश सिंह नितवाल की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ दस्तावेजों में हेरीफेरी, धोखाधड़ी और आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया है। विवेचना में आने वाले तथ्यों के आधार पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।