ऑर्बिट्रेटर एक्ट के अनुसार मध्यस्थ की फीस और प्रशासनिक व्यय मिलाकर संजीव को लगभग 2.70 लाख का भुगतान किया जाना था। नियमों के अनुसार यह धनराशि चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड व निर्माण कंपनी को आधा-आधा वहन करना था।
संजीव ने 23 फरवरी 2019 पारित अपने आदेश में मध्यस्थ के रूप में उनकी फीस और अन्य व्यय को केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से पुलवामा आतंकी हमले के शहीदों के परिजनों की सहायता के लिए खोले गए खाते में जमा कराने को कहा है।
इसके पहले भी 2015 में रमन मैगसायसाय अवार्ड मिलने पर उन्होंने पूरी धनराशि एम्स में गरीब मरीजों के इलाज के लिए दान कर दी थी। एम्स ने यह धनराशि स्वीकार नहीं की। इस पर चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में धनराशि दान कर दी थी। हाल में ही सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक फरवरी को दिए गए निर्णय में इस प्रकरण का विस्तार से उल्लेख भी किया गया है।