इंडियन काउंसिल फॉर फारेस्ट्री रिसर्च एंड एजूकेशन (आईसीएफआरई) को देश के सर्वमान्य शोध संस्थान काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) और इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (आईसीएआर) की तर्ज पर विकसित किया जाना था।
वर्ष 1991 में केंद्रीय कैबिनेट ने इस संबंध में नोट जारी किया। लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
वर्ष 2013 में योजना आयोग के अध्यक्ष प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने भी इसकी घोषणा की। लेकिन संस्थान के अफसरों के आगे यह घोषणा भी अमल में नहीं आ सकी।
कैग ने खोली धांधलियों और अधिकारियों की पोल
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने दो अप्रैल को भेजी रिपोर्ट में संस्थान की धांधलियों और अधिकारियों की मिलीभगत की जमकर पोल खोली है।
सीएजी ने साफ लिखा है कि अधिकारियों ने डेपुटेशन का खेल चलते रहने के लिए संस्थान को स्वायत्त नहीं बनने दिया।
सीएसआईआर और आईसीएआर जैसे स्वायत्त संस्थानों में किसी भी अधिकारी को डेपुटेशन पर लाने का कोई प्रावधान नहीं है।
12वीं पंचवर्षीय योजना का नहीं मिला कोई लाभ
योजना आयोग की स्टीयरिंग कमेटी भी इस बाबत लिख चुकी है लेकिन मार्च 2014 तक संस्थान की ओर से इस पर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाया गया।
जबकि संस्थान के स्वायत्त बनने पर वानिकी के क्षेत्र में शोध कार्यों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद थी।
यह हुआ नुकसान
स्वायत्त संस्थान न बन पाने की वजह से योजना आयोग की 12वीं पंचवर्षीय योजना का संस्थान को कोई लाभ नहीं मिल सका।
आयोग की ओर से सीधे मिलने वाला करोड़ों का बजट तो संस्थान के हाथ से गया ही, शोध कार्यों में भी गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में बेहतर काम नहीं हो सका।
इन अहम पदों पर हैं आईएफएस
पद ------ अधिकारी
डायरेक्टर जनरल - आईएफएस
डिप्टी डायरेक्टर जनरल - आईएफएस (4)
आईसीएफआरई के संस्थानों में निदेशक - आईएफएस (5), वैज्ञानिक (1)
निदेशक (सीसीएफ रैंक) - आईएफएस (1), वैज्ञानिक (1)
निदेशक (रिसर्च लैंडमार्क) - आईएफएस (1)
सीएफ/ डीसीएफ - आईएफएस (69)