- कैकई-दशरथ संवाद के भावुक मंचन ने दर्शकों को किया भावविभोर
- मंथरा के बहकावे में आकर कैकई ने मांगे दो वरदान, राम ने सहर्ष स्वीकारा वनवास
संवाद न्यूज एजेंसी
सेलाकुई। मुझे भरत के लिए राजतिलक और राम के लिए 14 वर्ष का वनवास चाहिए। कैकई के इन वचनों ने राजा दशरथ को भीतर तक झकझोर दिया। नगर के 52 बीघा मैदान में आयोजित रामलीला में कलाकारों ने कैकई-दशरथ संवाद और दो वरदान मांगने के प्रसंग का भावपूर्ण मंचन कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
दृश्य में दासी मंथरा के बहकावे में आकर माता कैकई राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांगती हैं। एक वरदान में पुत्र भरत के राजतिलक और दूसरे में श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगने पर राजा दशरथ व्याकुल हो उठते हैं। पिता के वचन की मर्यादा निभाने के लिए श्रीराम बिना किसी विरोध के वनवास स्वीकार कर लेते हैं। त्याग, कर्तव्य और पारिवारिक संबंधों को दर्शाते इस प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
इससे पूर्व शिव मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। समिति अध्यक्ष अशोक जोशी ने कहा कि कैकई का प्रसंग सिखाता है कि कुसंगति किस तरह सुखी परिवार को संकट में डाल सकती है। श्रीराम का पिता के वचनों के लिए सहर्ष वनवास स्वीकार करना सर्वोच्च त्याग और मर्यादा का उदाहरण है। इसे हर व्यक्ति को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।इस दौरान शूरवीर चौहान, डाल चंद, अजय खत्री, कुलदीप रावत और कार्यक्रम संचालक रविदास चंगोल आदि मौजूद रहे।