उत्तराखंड में जून 2013 में जलप्रलय प्राकृतिक घटना थी लेकिन इससे हुआ नुकसान मानवजनित था। बाढ़ में मलबे से तबाह हुई बस्तियों में जल विद्युत परियोजनाओं का मलबा घुसने से लोग बेघर हो गए। भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला अहमदाबाद में कराए गए जियोकेमिकल टेस्ट (भू-रसायन परीक्षण) में यह साबित हुई है।
मालूम हो कि 16/17 जून को जलप्रलय से उत्तराखंड की अलकनंदा और मंदाकिनी घाटी में व्यापक तबाही मची थी। आपदा के दौरान बहकर आई रेत, मिट्टी और पत्थरों में सैकड़ों स्थानीय निवासियों के भवन दब गए या बह गए। लोगों का कहना था कि परियोजनाओं के मलबे के कारण उनको बेघर होना पड़ा जबकि परियोजना निर्माण कंपनियों का दावा था कि परियोजनाओं के कारण नुकसान की तीव्रता कम हुई।
हकीकत जानने के लिए वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्ताओं की टीम ने वैज्ञानिक आधार पर इसका परीक्षण करने का निर्णय लिया।