जल विद्युत परियोजनाओं को लेकर उत्तराखंड सरकार को अच्छे दिन देखने को मिल सकते हैं। हालांकि अभी मूल सवाल अपनी जगह हैं।
अलकनंदा और भागीरथी बेसिन की 24 जल विद्युत परियोजनाओं पर राह भी खुलने के आसार हैं। साथ ही अन्य रियोजनाओं के लिए सरकार की राह खुलती दिख रही है।
प्रदेश में करीब 27 हजार मेगावाट जल विद्युत ऊर्जा उत्पादन की क्षमता का आकलन किया गया है। इसमें से केवल साढ़े तीन हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो पा रहा है।
आवंटन में गड़बड़ी की शिकायत से हुई थी निरस्त
पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के समय करीब 1600 मेगावाट की 96 जल विद्युत परियोजनाओं में 56 परियोजनाओं को आवंटित किया गया था।
बाद में आवंटन में गड़बड़ी की शिकायत के चलते इन परियोजनाओं का आवंटन निरस्त किया गया था। बाद में आवंटियों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटा कर परियोजनाओं को निरस्त किए जाने को चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार के फैसले को सही ठहरा दिया है। इससे अब इन परियोजनाओं के नए सिरे से आवंटन का रास्ता भी खुल गया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद शुरु होंगी परियोजनाएं
जून 2013 की आपदा के बाद प्रदेश में पर्यावरण बनाम विकास की बहस भी खड़ी हो गई थी। यह भी कहा गया था कि आपदा की भयावहता को बढ़ाने में जल विद्युत परियोजनाओं का भी हाथ रहा।
ऐसे में इन परियोजनाओं पर रोक लग गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद कि इन परियोजनाओं पर हमेशा के लिए रोक नहीं लगाई जा सकती, प्रदेश सरकार को थोड़ी राहत महसूस होगी।
इसके साथ ही अन्य परियोजनाओं के लिए भी रास्ता खुलता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदेश में जल विद्युत परियोजनाओं को ऊर्जा जरूरत पूरी होने के अलावा निवेश को हरी झंडी के रूप में भी देखा जा रहा है।
लोहारी नागपाला, पाला मनेरी और भैरोघाटी पहले से ही बंद हैं।