सालों साल यह सिलसिला यूं ही चलता रहा। इसके बाद दिसंबर 2017 में अनिल ने युवती से कहा कि वह उससे शादी करना चाहता है। इस पर वह भी तैयार हो गई और 11 दिसंबर 2017 को अनिल के कुछ दोस्तों की मौजूदगी में मसूरी स्थित एक जगह उन्होंने शादी कर ली।
शादी पंडित ने सनातन रीति रिवाज से कराई थी। इसके बाद अनिल उसे लेकर बड़ोवाला के एक मकान में आ गया। सुबह वह युवती को कमरे में ही छोड़कर बाहर निकला और किसी से बात करने लगा। युवती ने उसकी बातें सुनी तो पता चला कि उसका नाम अनिल नहीं बल्कि अब्बास है।
इस पर जब उसने विरोध किया और खुद को फंसाए जाने की बात कही तो वह धमकी देने लगा। इस बीच युवती को पता चला कि अब्बास दूसरी शादी भी करना चाहता है। इसके बाद वह थाने पहुंच गई।
शासकीय अधिवक्ता जया ठाकुर ने बताया कि अब्बास के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और पुलिस ने तय समय सीमा में ही आरोपपत्र दाखिल कर दिया। इस मुकदमे में अभियोजन की ओर से पंडित समेत सात गवाह पेश किए गए। इनकी गवाही और तमाम साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने उसे सात साल की सजा और तीस हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।